Saturday, January 17, 2026

India – Russia रक्षा सहयोग: नई दिल्ली में 22nd Inter-Governmental Commission Meeting आज

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PKN LIVE | 22nd Inter-Governmental Commission Meeting: India – Russia के बीच defence cooperation, military technical cooperation, S-400, S-500, और BrahMos missile जैसे रणनीतिक मुद्दों पर तेजी से आगे बढ़ रही साझेदारी एक नए पड़ाव पर पहुंचने वाली है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रूस के रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलोउसॉव आज नई दिल्ली में 22nd Inter-Governmental Commission ऑन मिलिट्री एंड मिलिट्री टेक्निकल कोऑपरेशन की उच्च स्तरीय बैठक की संयुक्त अध्यक्षता करेंगे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चार वर्षों बाद भारत की यात्रा पर आने वाले हैं, जिससे द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।

इस विस्तृत रिपोर्ट में बैठक के प्रमुख एजेंडा, रक्षा खरीद, संयुक्त परियोजनाएं, ship-building सहयोग, BrahMos के उन्नत संस्करण, S-400 और S-500 प्रणाली पर विचार, दोनों देशों की रणनीतिक प्राथमिकताएं और आने वाली Summit के महत्व को विस्तार से समझाया गया है।

22nd Inter-Governmental Commission Meeting : नई दिल्ली में होने वाली बैठक का प्रमुख एजेंडा

भारत और रूस के रक्षा मंत्रियों की यह बैठक दोनों देशों के लिए strategic defence partnership को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उच्च स्तरीय अधिकारी बताते हैं कि बातचीत का मुख्य फोकस निम्नलिखित बिंदुओं पर रहेगा:

1. S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की समयबद्ध डिलीवरी

भारत ने पांच S-400 ‘Triumf’ एयर डिफेंस यूनिट्स का ऑर्डर दिया था, जिनमें से तीन भारत को मिल चुकी हैं। शेष दो यूनिट्स की डिलीवरी 2026 और 2027 में तय है।

रूसी रक्षा मंत्री बेलोउसॉव पहले भी यह आश्वासन दे चुके हैं कि डिलीवरी कार्यक्रम में किसी प्रकार की देरी नहीं होगी। आज की बैठक में दोनों पक्ष S-400 delivery schedule की समीक्षा करेंगे और भविष्य की आवश्यकताओं का आकलन करेंगे।

2. अतिरिक्त S-400 और उन्नत S-500 पर चर्चा

सूत्रों के अनुसार भारत शेष डिलीवरी के साथ-साथ अतिरिक्त S-400 यूनिट्स खरीदने की संभावना पर विचार कर सकता है। इसके साथ ही रूस की अगली पीढ़ी की मिसाइल डिफेंस प्रणाली S-500 ‘Prometey’ पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

S-500 की प्रमुख विशेषताएं:

  • 600 km तक बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्शन

  • 400 km तक हवाई खतरों को बेअसर करने की क्षमता

  • Hypersonic targets को भी ट्रैक और इंटरसेप्ट करने की तकनीक

यदि इस पर किसी प्रकार की औपचारिक वार्ता आगे बढ़ती है, तो यह भारत की air defence capability को और मजबूत करेगा।

ब्रह्मोस के उन्नत संस्करणों पर संयुक्त विकास

भारत-रूस रक्षा सहयोग की सबसे सफल परियोजनाओं में BrahMos missile system शामिल है। बैठक में BrahMos Next-Generation, लंबी दूरी के संस्करण तथा समुद्री और हवाई प्लेटफॉर्म्स पर आधारित नए वेरिएंट्स पर गहन चर्चा की उम्मीद है।

दोनों देश पहले से ही समुद्री सुरक्षा, समुद्री डोमिनेंस और सामरिक पैंतरेबाज़ी के लिए ब्रह्मोस को साझा सफलता का प्रतीक मानते हैं। आने वाले वर्षों में इसे 800–1000 km रेंज तक विकसित करने की दिशा में भी संयुक्त प्रयास जारी हैं।

Ship-Building और संयुक्त हथियार निर्माण में गति

22nd Inter-Governmental Commission Meeting : बैठक का एक और प्रमुख एजेंडा ship-building cooperation है। भारतीय नौसेना की बढ़ती आवश्यकताओं को देखते हुए रूस ने भारत को सहयोग बढ़ाने की पेशकश की है।

संभावित क्षेत्रों में शामिल हैं:

  • फ्रिगेट और कॉर्वेट-क्लास जहाजों का संयुक्त निर्माण

  • पनडुब्बी तकनीक पर सहयोग

  • Naval propulsion systems का स्थानीयकरण

  • Maintenance, repair and overhaul (MRO) सुविधाओं का विस्तार

Make in India defence manufacturing में रूस की भागीदारी को मजबूत करने पर भी चर्चा होगी।

भारतीय रक्षा उत्पादन क्षमता का प्रदर्शन

रूसी रक्षा मंत्री बेलोउसॉव भारतीय रक्षा उद्योग की क्षमताओं का प्रत्यक्ष अवलोकन करेंगे। बैठक के दौरान उन्हें नई तकनीकों, स्वदेशी प्रणाली विकास और export-ready हथियार प्रणालियों का प्रस्तुतीकरण दिखाया जाएगा।

यह प्रदर्शन भारत के बढ़ते defence exports, आत्मनिर्भरता और private-public defence ecosystem को उजागर करेगा।

उच्च स्तरीय निजी रात्रिभोज और गहन रणनीतिक वार्ताएँ

बैठक के बाद दोनों देशों के शीर्ष रक्षा अधिकारियों और मंत्रियों के बीच एक निजी रात्रिभोज प्रस्तावित है। सूत्र बताते हैं कि इस अनौपचारिक वार्तालाप में संवेदनशील और व्यापक रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा जारी रहेगी, जिनका उद्देश्य आने वाले वर्षों में defence roadmap को और स्पष्ट करना है।

राजनाथ सिंह और बेलोउसॉव की पिछली मुलाकात

दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात जून 2025 में चीन के क़िंगदाओ में SCO Defence Ministers’ meeting के दौरान हुई थी। उस बैठक में रूस ने भारत को S-400 डिलीवरी कार्यक्रम के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी।

भारत इस सिस्टम का संचालन ‘सुदर्शन चक्र’ नाम से कर रहा है, जिसने हाल ही में हुए Operation Sindoor में अपनी प्रभावशीलता साबित की।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि

रूसी रक्षा मंत्री नई दिल्ली स्थित National War Memorial पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। भारतीय सैनिकों की वीरगाथाओं और बलिदान को सम्मान देने की यह कूटनीतिक परंपरा दोनों देशों की रक्षा साझेदारी के सम्मान और विश्वास का प्रतीक मानी जाती है।

पुतिन की प्रस्तावित भारत यात्रा और वार्ता का महत्व

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चार साल बाद भारत के दौरे पर आने वाले हैं। यह यात्रा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच होने वाली 23वीं वार्षिक Summit का मुख्य फोकस होगा:

  • द्विपक्षीय रक्षा सहयोग

  • ऊर्जा साझेदारी

  • व्यापार और निवेश

  • वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा

  • Indo-Pacific और Eurasian security dynamics

आज की रक्षा मंत्री-स्तरीय बैठक इस 22nd Inter-Governmental Commission Meeting के लिए आधार तैयार करेगी और कई महत्वपूर्ण MoUs तथा समझौतों को अंतिम रूप देने में मदद करेगी।

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