PKN LIVE : Delhi की Lutyens गलियों में इस वक्त सबसे बड़ी चर्चा यह है कि आखिर Hiren Joshi कहां गए? क्या उन्हें PMO से हटा दिया गया है? क्या यह एक सामान्य प्रशासनिक बदलाव है या फिर सरकार के डिजिटल और मीडिया command centre में कोई बड़ा फेरबदल चल रहा है?
सरकारी तौर पर अभी तक न कोई नोट, न कोई notification, न ही कोई स्पष्टीकरण जारी हुआ है। PMO की तरफ से पूरी चुप्पी है। ऐसे में सवाल बढ़ रहे हैं और माहौल पहले से ज्यादा राजनीतिक और सस्पेंस से भरा दिख रहा है।
Hiren Joshi : Modi सिस्टम का “Motherboard” जिसने बनाया डिजिटल NaMo Universe
Hiren Joshi profile, PMO media strategy, India political communication जैसे seo keywords के बीच यह समझना जरूरी है कि Hiren Joshi कौन हैं और उनका हटना क्यों इतना बड़ा मुद्दा माना जा रहा है।
Open Magazine ने उन्हें एक बार “ecosystem का motherboard” कहा था।
वे सिर्फ PM Modi के digital advisor नहीं थे, बल्कि उन्होंने पूरा NaMo online ecosystem खड़ा किया था।
Bhilwara के पूर्व इंजीनियरिंग प्रोफेसर Hiren Joshi की दिल्ली की सत्ता तक पहुंच किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। 2008 में एक कार्यक्रम के दौरान तकनीकी समस्या हल करते हुए वह मोदी के ध्यान में आए और इसके बाद वे लगातार उनकी टीम का सबसे प्रभावशाली हिस्सा बनते गए।
Gandhinagar से लेकर दिल्ली तक वे Modi के eyes and ears, messaging के रणनीतिकार, और मीडिया पर नज़र रखने वाले व्यक्ति के रूप में पहचान बनाए हुए थे।
2014 में PMO में मोदी के साथ प्रवेश करने के बाद 2019 तक वे Joint Secretary / OSD (Comms & IT) तक पहुंच गए। मीडिया के बड़े संपादक, खबरिया संस्थानों के मालिक, मंत्री और सोशल मीडिया warriors तक – सभी जानते थे कि उन्हें Hiren Joshi की “नाराज़गी” से बचकर रहना है।
PMO चुप है, लेकिन Delhi बोल रहा है: रूटीन ट्रांसफर या कोई बड़ा संकेत?
अगर ऐसा व्यक्ति अचानक भूमिका से हट रहा है, तो यह “routine transfer” नहीं माना जा सकता।
Delhi यह जानता है। Delhi यह महसूस भी कर रहा है।
सत्ता गलियारों में फुसफुसाहट है कि शायद कोई विवाद हुआ है, शायद कोई नीति परिवर्तन हुआ है, शायद PMO का media command structure बदला जा रहा है, या शायद यह सिर्फ एक आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रिया हो।
लेकिन जब PMO चुप हो और corridors इतने जीवंत हों, तो speculation अपनी जगह खुद बना लेता है।
WhatsApp University: Rumour Factory जिसने कहानी को और गरम किया
जिस WhatsApp architecture को Hiren Joshi ने एक national communication ecosystem में बदला, आज वही WhatsApp उनकी अनुपस्थिति को लेकर हर तरह के संदेशों से भरा हुआ है।
चूंकि किसी भी अफवाह को सत्यापित नहीं किया जा सकता, इसलिए हम उन forwards का एक शब्द भी यहां दोहराना उचित नहीं समझते।
लेकिन यह साफ है कि माहौल अप्रत्याशित रूप से charged है।
Pawan Khera ने आग में घी डाला: अब मामला विपक्ष बनाम सत्ता का
Congress नेता Pawan Khera ने कल एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन अटकलों को “आधिकारिक रूप से” national discussion बना दिया।
उन्होंने कहा कि Hiren Joshi कोई छोटा नाम नहीं है।
यह वह व्यक्ति है जिसने India media ecosystem और digital political messaging को एक नए रूप में ढाला।
Khera का आरोप था कि:
“उन्होंने देश में democracy को दबाने में बड़ी भूमिका निभाई।”
“मीडिया की आवाज़ को throttling करने में वे मुख्य कड़ी थे।”
“देश को जानने का अधिकार है कि उनके business partners कौन हैं, वे PMO में बैठकर किस तरह का business चला रहे थे।”
यह पहली बार था जब विपक्ष ने सीधे PMO के भीतर किसी अधिकारी की भूमिका को लेकर इस तरह की transparency मांग उठाई।
सबसे बड़ा सवाल: अगर Hiren Joshi नहीं हैं, तो मीडिया का रिमोट किसके हाथ में है?
Indian news ecosystem, PMO control, media narrative setting जैसे keywords के बीच असली चिंता पत्रकारिता जगत को लेकर है।
कई TV न्यूज़रूम में panic फैल गया है।
एक वरिष्ठ नेता ने एक पत्रकार से—और उसने हमसे—कहा:
“Anchors upset हैं। Hiren bhai नहीं हैं। अब उन्हें खुद story ढूंढनी पड़ेगी।”
इस कथन में Delhi की राजनीतिक व्यंग्य और सच्चाई दोनों छिपे हैं।
Primetime anchors के लिए यह भयावह कल्पना है —
खुद stories ढूंढना
खुद sources कॉल करना
खुद narratives बनाना
खुद सवाल तय करना
यानी Journalism करना।
कई चैनलों का यह कहना है कि अगर PMO की तरफ से संकेत नहीं आएंगे, अगर “आज का rage topic” तय नहीं होगा, अगर “Opposition Deshdrohi edition” जैसी लाइनें नहीं मिलेंगी, अगर talking points WhatsApp पर नहीं भेजे जाएंगे—
तो TV पर क्या चलेगा?
यदि बदलाव सच है तो नया Media Command Centre कौन संभालेगा?
यह सवाल Delhi की political circles में सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है:
अगर वाकई Hiren Joshi हट गए हैं तो —
Channels को रोज़ का narrative कौन भेजेगा?
9 PM debates का mood कौन सेट करेगा?
किस issue को “national security” और किसे “anti-national” बनाना है, इसका निर्णय कौन लेगा?
मीडिया की निगरानी अब कौन करेगा?
कौन बताएगा कि आज किसे blacklist करना है और किसे amplify?
Delhi की राजनीति में ऐसा vacuum बहुत कम देखने को मिलता है।
Hiren Joshi का Exit: सबसे बड़ा Story जिसे वह खुद script नहीं कर पाए
यह पूरी स्थिति दिलचस्प इसलिए है क्योंकि देश की headlines को वर्षों तक नियंत्रित करने वाला व्यक्ति ही अपने संभावित exit को headline बनने से नहीं रोक पाया।
Delhi में यह बात कही जा रही है कि:
“UPA-II के आखिरी दिनों के बाद पहली बार power corridors इतने gossip-heavy और vibrant दिख रहे हैं।”
यह संकेत है कि कुछ तो बदल रहा है।
शायद बड़ा बदलाव।
शायद केवल perception का आंधी।
या शायद PMO के अंदर कोई नई संरचना तैयार हो रही है।