Sunday, January 18, 2026

राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख संत डॉ. रामविलास दास वेदांती का निधन, कोहरे के कारण एयर एंबुलेंस नहीं उतर सकी

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PKN Live | Dr Ramvilas Das Vedanti Passes Away : राम मंदिर आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ संत, राम जन्मभूमि न्यास के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती का सोमवार को निधन हो गया। मध्यप्रदेश के रीवा में दोपहर करीब 12:20 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। वे 67 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से अयोध्या से लेकर पूरे देश में शोक की लहर फैल गई है, खासकर उन लोगों के बीच जो राम मंदिर आंदोलन से भावनात्मक रूप से जुड़े रहे हैं।

रामकथा के दौरान बिगड़ी तबीयत

डॉ. वेदांती इन दिनों रीवा में रामकथा कर रहे थे। कथा के दौरान ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें रीवा के एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बीते दो दिनों से डॉक्टरों की टीम उनकी हालत पर लगातार नजर बनाए हुए थी, लेकिन सोमवार सुबह उनकी स्थिति तेजी से गंभीर हो गई।

एयर एंबुलेंस आई, लेकिन कोहरा बना बाधा

डॉक्टरों ने उनकी बिगड़ती हालत को देखते हुए उन्हें भोपाल स्थित एम्स ले जाने का फैसला किया। इसके लिए एयर एंबुलेंस भी रीवा पहुंच गई थी। हालांकि, मौसम ने साथ नहीं दिया। घने कोहरे के कारण एयर एंबुलेंस लैंड नहीं कर सकी और उन्हें एयरलिफ्ट करना संभव नहीं हो पाया। कुछ ही समय बाद अस्पताल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।

सेप्टीसीमिया बना मौत की वजह

रीवा के जिस अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, वहां के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. वी.डी. त्रिपाठी ने बताया कि डॉ. रामविलास दास वेदांती सेप्टीसीमिया से पीड़ित थे। यह स्थिति तब होती है जब शरीर में किसी संक्रमण के कारण खून में जहर फैलने लगता है। डॉक्टरों के अनुसार, संक्रमण उनके खून के जरिए किडनी, फेफड़े और लीवर तक फैल चुका था। तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

सेप्टीसीमिया को आम भाषा में ब्लड पॉइजनिंग कहा जाता है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अत्यधिक प्रतिक्रिया देने लगती है और महत्वपूर्ण अंग काम करना बंद कर सकते हैं।

अयोध्या में होगा अंतिम संस्कार

डॉ. वेदांती के उत्तराधिकारी महंत राघवेश दास वेदांती ने जानकारी दी कि उनका पार्थिव शरीर अयोध्या लाया जा रहा है। मंगलवार सुबह उनकी अंतिम यात्रा अयोध्या के हिंदू धाम से निकलेगी, जो राम मंदिर परिसर तक जाएगी। सरयू नदी के तट पर सुबह 8 बजे पूरे विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

बचपन में ही मां को खोया, संत जीवन की शुरुआत

डॉ. रामविलास दास वेदांती का जन्म 7 अक्टूबर 1958 को मध्यप्रदेश के रीवा जिले के गुढ़वा गांव में हुआ था। उनका बचपन संघर्षों से भरा रहा। मात्र दो वर्ष की उम्र में उनकी मां का निधन हो गया था। उनके पिता राम सुमन त्रिपाठी पेशे से पुरोहित थे और पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन सिंह के गुरु भी रह चुके थे।

करीब 12 साल की उम्र में वे अयोध्या आ गए थे और यहीं का होकर रह गए। अयोध्या में उन्होंने हनुमानगढ़ी के महंत अभिराम दास को अपना गुरु बनाया और साधु जीवन की दीक्षा ली।

अयोध्या में संत से आंदोलनकारी तक का सफर

अयोध्या के नया घाट क्षेत्र में उन्होंने हिंदू धाम में निवास किया। यहां से उन्होंने दशकों तक रामकथा के माध्यम से लोगों में धार्मिक चेतना जगाई। रामलला और हनुमानगढ़ी के सामने उनकी रामकथा पूरे देश में प्रसिद्ध रही।

1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद वे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए। श्रीराम मंदिर आंदोलन को वैचारिक और धार्मिक आधार देने में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। इसी योगदान के चलते उन्हें राम जन्मभूमि न्यास का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया।

सांसद के रूप में भी निभाई भूमिका

धार्मिक जीवन के साथ-साथ डॉ. वेदांती ने सक्रिय राजनीति में भी भाग लिया। वर्ष 1996 में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले की मछलीशहर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, जहां से वे सांसद चुने गए।

इसके बाद 1998 में उन्होंने प्रतापगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और दूसरी बार संसद पहुंचे। संसद में रहते हुए भी वे राम मंदिर आंदोलन और हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों पर मुखर रहे।

आश्रम और धार्मिक विरासत

डॉ. वेदांती का अयोध्या में ‘वशिष्ठ भवन’ नामक आश्रम भी है, जो आज भी राम भक्तों और संतों का प्रमुख केंद्र माना जाता है। उनके शिष्यों और अनुयायियों की संख्या देशभर में फैली हुई है। वे संत होने के साथ-साथ एक कुशल वक्ता और विचारक भी थे।

नेताओं और संत समाज की श्रद्धांजलि

उनके निधन पर देशभर के नेताओं और संत समाज ने शोक व्यक्त किया है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा,
“पूज्य संत डॉ. रामविलास दास वेदांती का निधन सनातन संस्कृति के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका जाना एक युग का अंत है। धर्म, समाज और राष्ट्र को समर्पित उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।”

मध्यप्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने कहा,
“उन्होंने न केवल रामभक्तों को एकजुट किया, बल्कि न्यायालय में भी सत्य और आस्था के पक्ष में निर्भीक होकर गवाही दी। उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।”

किशोरी रमण अग्रवाल, जो उनके पड़ोसी और शिष्य रहे हैं, ने कहा,
“अयोध्या के लोग उन्हें बहुत प्रेम करते थे। उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई। वे हमेशा राम भक्तों के योद्धा के रूप में याद किए जाएंगे।”

एक युग का अंत

डॉ. रामविलास दास वेदांती का निधन सिर्फ एक संत का जाना नहीं, बल्कि राम मंदिर आंदोलन के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत माना जा रहा है। उनका जीवन संघर्ष, त्याग, आस्था और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक रहा। आने वाली पीढ़ियां उन्हें राम मंदिर आंदोलन के मजबूत स्तंभ के रूप में याद करेंगी।

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