PKN Live | वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में दर्शन और पूजा की व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान सोमवार को कड़ी टिप्पणियां सामने आईं। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने मंदिर में वीआईपी दर्शन और विशेष पूजा की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि भगवान को विश्राम तक का समय नहीं दिया जा रहा है, जबकि आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन के समय सीमित कर दिए जाते हैं।
यह टिप्पणी उस समय आई, जब सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ—जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचौली शामिल हैं—श्री बांके बिहारी मंदिर के सेवायतों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले नियुक्त की गई एक हाई पावर्ड कमेटी ने यह सुझाव दिया था कि आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का समय बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि भारी भीड़ और अव्यवस्था को नियंत्रित किया जा सके। इसी कमेटी के निर्देशों का मंदिर के सेवायतों ने विरोध किया है और इसे मंदिर की परंपराओं में हस्तक्षेप बताया है।
सेवायतों का कहना है कि दर्शन की टाइमिंग मंदिर के धार्मिक अनुष्ठानों से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है और इसमें बदलाव करने से पूजा-पद्धति प्रभावित होगी।
सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा गया?
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने अदालत में दलील दी कि दर्शन का समय बदलना केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह मंदिर की सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं से जुड़ा मामला है।
इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सीधा सवाल किया—
“अगर दर्शन का समय बढ़ा दिया जाए तो इसमें आपत्ति क्या है?”
इसके जवाब में वकील ने कहा कि दर्शन की टाइमिंग में बदलाव का मतलब है मंदिर के अंदर होने वाले अनुष्ठानों में भी बदलाव, जिसमें भगवान का विश्राम काल भी शामिल है।
CJI सूर्यकांत की तीखी टिप्पणी
इसी बिंदु पर CJI सूर्यकांत ने बेहद सख्त और संवेदनशील टिप्पणी की। उन्होंने कहा—
“दिन में 12 बजे मंदिर बंद होने के बाद भी भगवान को एक मिनट का विश्राम नहीं मिलता। उसी समय उन्हें सबसे ज्यादा परेशान किया जाता है।”
उन्होंने आगे कहा कि जब आम श्रद्धालु दर्शन नहीं कर सकते, तब मोटी फीस देने वाले लोगों के लिए विशेष पूजा करवाई जाती है।
“धनी लोगों को बुलाया जाता है, जो ज्यादा पैसा दे सकते हैं, और उनके लिए स्पेशल पूजा आयोजित होती है। यह व्यवस्था किसके हित में है?”—CJI ने सवाल उठाया।
वीआईपी पूजा बनाम आम श्रद्धालु
कोर्ट की टिप्पणी का साफ संकेत था कि मौजूदा व्यवस्था में आम श्रद्धालु और संपन्न भक्तों के बीच असमानता है। जहां आम भक्तों को सीमित समय और लंबी कतारों में दर्शन करने पड़ते हैं, वहीं विशेष शुल्क देकर वीआईपी पूजा करवाई जाती है।
CJI सूर्यकांत ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि अगर दर्शन की मूल टाइमिंग में बदलाव से 10–15 हजार भक्त कम भी हो जाएं, तो इससे क्या फर्क पड़ेगा, अगर इससे भगवान को विश्राम और व्यवस्था में संतुलन आता है?
भगदड़ की आशंका पर सेवायतों की दलील
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि दर्शन का समय बढ़ाने से भीड़ अनियंत्रित हो सकती है और भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। इस पर कोर्ट ने कहा कि भीड़ प्रबंधन एक अलग मुद्दा है और इसके लिए प्रशासनिक समाधान निकाले जा सकते हैं।
CJI ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की संख्या नियंत्रित करने के लिए व्यवस्थाएं बनाई जा सकती हैं, लेकिन इसके नाम पर विशेष पूजा के जरिए भेदभाव स्वीकार्य नहीं है।
देहरी पूजा का मुद्दा भी उठा
सुनवाई के दौरान सेवायतों ने देहरी पूजा का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि देहरी पूजा भगवान के चरणों के पास एक विशेष स्थान पर होती है, जो गुरु और शिष्य के बीच परंपरागत रूप से की जाती रही है, लेकिन अब इसे बंद कर दिया गया है।
उन्होंने सुझाव दिया कि इस पूजा को पूरी तरह खत्म नहीं किया जाना चाहिए। इस पर कोर्ट ने कहा कि मंदिर प्रबंधन को इस मामले में पक्षकार बनाया जाएगा ताकि सभी पहलुओं पर संतुलित निर्णय लिया जा सके।
हाई पावर्ड कमेटी और यूपी सरकार को नोटिस
सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा के जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से हाई पावर्ड कमेटी और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले की अगली सुनवाई जनवरी में की जाएगी।
साथ ही, श्री बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन को भी औपचारिक रूप से पक्षकार बनाने का निर्देश दिया गया है, ताकि मंदिर की परंपराओं और श्रद्धालुओं के हितों के बीच संतुलन बनाया जा सके।
श्रद्धा, परंपरा और व्यवस्था के बीच संतुलन की कोशिश
यह मामला सिर्फ दर्शन की टाइमिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि धार्मिक स्थलों पर श्रद्धा, परंपरा और आधुनिक प्रबंधन के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से यह साफ है कि अदालत भगवान की गरिमा, आम श्रद्धालुओं के अधिकार और पारदर्शी व्यवस्था—तीनों को एक साथ देखना चाहती है।
श्री बांके बिहारी मंदिर से जुड़ा यह मामला आने वाले समय में देशभर के धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं पर असर डाल सकता है। CJI सूर्यकांत की टिप्पणी ने वीआईपी पूजा और आम श्रद्धालुओं के बीच बढ़ते अंतर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सबकी नजर जनवरी में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि मंदिर की परंपराएं और श्रद्धालुओं की सुविधा किस दिशा में आगे बढ़ेंगी।


