PKN Live | Sanjay saraogi BJP ने बिहार की राजनीति में एक बड़ा और अहम फैसला लेते हुए दारभंगा से छह बार विधायक रहे संजय सरावगी को पार्टी का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। वह वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष दिलीप कुमार जायसवाल की जगह लेंगे। संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर लंबे अनुभव के चलते सरावगी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
संगठन को मिला अनुभवी चेहरा
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि संजय सरावगी का राजनीतिक अनुभव, उनकी साफ छवि और संगठनात्मक क्षमता बिहार में पार्टी को नई मजबूती दे सकती है। खासतौर पर ऐसे समय में जब राज्य में आगामी राजनीतिक चुनौतियां सामने हैं, पार्टी एक भरोसेमंद और अनुभवी नेतृत्व पर दांव लगाना चाहती थी।
छह बार विधानसभा पहुंचे संजय सरावगी
Sanjay Saraogi बिहार के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने दारभंगा विधानसभा सीट से लगातार छह चुनाव जीते हैं। उन्होंने यह उपलब्धि निम्न वर्षों में हासिल की:
फरवरी 2005
अक्टूबर 2005
2010
2015
2020
2025
यह सिलसिला उन्हें बिहार भाजपा के सबसे मजबूत और लगातार जीत दर्ज करने वाले नेताओं में शुमार करता है।
2025 विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में संजय सरावगी ने विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के उम्मीदवार उमेश सहनी को 24,593 वोटों के बड़े अंतर से हराया। यह जीत न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता को दर्शाती है, बल्कि दारभंगा में भाजपा की मजबूत पकड़ को भी साबित करती है।
राजनीतिक सफर की शुरुआत 2005 से
Sanjay Saraogiने पहली बार फरवरी 2005 में बिहार विधानसभा में कदम रखा। तब उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उम्मीदवार मोहम्मद मुमताज़ को 14,188 वोटों से हराया था।
इसके बाद अक्टूबर 2005 में हुए चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के डॉ. मदन मोहन झा को 24,983 वोटों से मात दी और अपनी स्थिति और मजबूत कर ली।
लगातार बढ़ता जनाधार
2010 में उन्होंने RJD के सुल्तान अहमद को 27,554 वोटों से हराया
2015 में RJD उम्मीदवार ओम प्रकाश खेड़िया को शिकस्त दी
2020 में RJD के अमरनाथ गामी को हराकर जीत की हैट्रिक पूरी की
इन चुनावों में उनकी जीत का अंतर लगातार बढ़ता गया, जो उनके मजबूत जनसंपर्क और विकास कार्यों को दर्शाता है।
मंत्री के रूप में भी निभाई अहम भूमिका
Sanjay Saraogi नीतीश कुमार सरकार में राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री भी रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने भूमि रिकॉर्ड, दाखिल-खारिज और राजस्व व्यवस्था को लेकर कई अहम फैसलों में भूमिका निभाई।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, उनकी कार्यशैली, ईमानदार छवि और प्रशासनिक समझ के चलते ही उन्हें अब संगठन की कमान सौंपी गई है।
भाजपा को क्यों चुना Sanjay Saraogi?
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि:
वह जमीनी स्तर से जुड़े नेता हैं
संगठन और सरकार दोनों का अनुभव रखते हैं
विवादों से दूर साफ छवि रखते हैं
कार्यकर्ताओं के बीच स्वीकार्यता है
इन्हीं कारणों से पार्टी ने उन्हें बिहार भाजपा अध्यक्ष जैसी बड़ी जिम्मेदारी दी है।
नितिन नबीन बने भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष
इसी दिन भाजपा ने एक और बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए नितिन नबीन को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया।
दिल्ली में संभाला कार्यभार
नितिन नबीन ने सोमवार को दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में अपने नए पद का कार्यभार संभाला। इस मौके पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, जिनमें शामिल थे:
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान
पटना से दिल्ली तक का सफर
नितिन नवीन, नियुक्ति के एक दिन बाद पटना से दिल्ली पहुंचे। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका स्वागत दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और भाजपा के अन्य नेताओं ने किया।
कौन हैं नितिन नवीन?
उम्र: 45 वर्ष
बिहार सरकार में मंत्री
पांच बार के विधायक
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से प्रतिनिधित्व
वह दिवंगत भाजपा नेता और पूर्व विधायक नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के पुत्र हैं।
RSS पृष्ठभूमि और संगठनात्मक पकड़
नितिन नबीन का संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से रहा है। पार्टी नेताओं के अनुसार, वह विचारधारात्मक रूप से मजबूत, अनुशासित और संगठन के प्रति पूरी तरह समर्पित नेता हैं।
राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ता कद
भाजपा सूत्रों का मानना है कि नितिन नवीन आने वाले समय में जेपी नड्डा के उत्तराधिकारी के तौर पर भी उभर सकते हैं। उनकी नियुक्ति को पार्टी में जनरेशन शिफ्ट के रूप में देखा जा रहा है।
उन्होंने बिहार सरकार में मंत्री रहते हुए और छत्तीसगढ़ के संगठन प्रभारी के तौर पर जिस तरह काम किया, उससे पार्टी नेतृत्व काफी प्रभावित है।
संजय सरावगी को बिहार भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाना और नितिन नवीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी देना, दोनों फैसले भाजपा की रणनीतिक और संगठनात्मक मजबूती की ओर इशारा करते हैं। इन नियुक्तियों से साफ है कि पार्टी अब अनुभवी लेकिन अपेक्षाकृत युवा और जमीनी नेताओं पर भरोसा जता रही है।


