ED, CBI को क्या TMC के गुंडे रोकेंगे? I-PAC Raid Case में ममता बनर्जी पर BJP का बड़ा हमला

PKN Live | पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। I-PAC Raid Case को लेकर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद अब सियासी घमासान और तेज हो गया है। कोलकाता में I-PAC (Indian Political Action Committee) के दफ्तर पर ईडी की छापेमारी से जुड़े मामले में शीर्ष अदालत ने बंगाल सरकार को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि राज्य सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों के काम में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

इस पूरे मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने सीधे तौर पर ममता बनर्जी को निशाने पर लेते हुए कहा कि “ईडी और सीबीआई को क्या टीएमसी के गुंडे रोकेंगे?” उन्होंने बंगाल में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए इसे “जंगल राज” करार दिया।

I-PAC Raid Case क्या है?

पिछले सप्ताह कोलकाता में I-PAC के कार्यालय पर Enforcement Directorate यानी ईडी ने छापेमारी की थी। यह कार्रवाई एक जांच के सिलसिले में की गई थी, लेकिन इस दौरान ईडी अधिकारियों को कथित तौर पर विरोध, बाधा और दबाव का सामना करना पड़ा।

ईडी का आरोप है कि छापेमारी के दौरान न सिर्फ अधिकारियों को रोका गया, बल्कि उनके खिलाफ एफआईआर तक दर्ज कर दी गई। इसी को लेकर ईडी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और बंगाल सरकार पर जांच में बाधा डालने का गंभीर आरोप लगाया।

Supreme Court का सख्त रुख, बंगाल सरकार को झटका

Supreme Court of India ने इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर इस तरह की घटनाओं पर रोक नहीं लगी, तो देश में अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने कहा कि किसी भी राज्य सरकार को यह अधिकार नहीं है कि वह ईडी या सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों के काम में दखल दे। कोर्ट ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसे बीजेपी ने बंगाल सरकार के लिए “कानूनी तमाचा” बताया।

BJP का आरोप: बंगाल में जंगल राज

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बीजेपी ने ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर हमला तेज कर दिया। बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि ममता बनर्जी “अराजकता की मूर्ति और जंगल राज का प्रतीक” बन चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। बीजेपी नेता के मुताबिक, “जंगल राज ममता राज जैसा होता है। जहां कानून की जगह डर चलता है, पुलिस और प्रशासन गैरकानूनी काम करते हैं और केंद्रीय एजेंसियों को भी धमकाने की कोशिश होती है।”

ED CBI Investigation पर TMC का रवैया सवालों के घेरे में

बीजेपी का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस लगातार ED CBI Investigation को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है। गौरव भाटिया ने कहा कि टीएमसी के नेता खुलेआम लोगों को मैसेज भेजते हैं कि हाई कोर्ट पहुंच जाओ, जिससे दबाव बनाया जा सके।

उनका कहना था कि यह सब जांच एजेंसियों को डराने और काम से रोकने की साजिश का हिस्सा है। बीजेपी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में स्थिति ऐसी है कि वहां अदालतों तक के कामकाज में बाधा डालने की कोशिश की जाती है।

I-PAC Office और Private Company का मुद्दा

इस पूरे मामले में एक और गंभीर सवाल उठाया गया है। बीजेपी ने आरोप लगाया कि I-PAC का दफ्तर एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के परिसर से चल रहा है। गौरव भाटिया ने कहा कि यह बेहद हैरान करने वाली बात है कि सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़ी गतिविधियां एक निजी कंपनी के कार्यालय से संचालित हो रही हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ममता बनर्जी और उनकी सरकार से जुड़े कई गोपनीय दस्तावेज उसी प्राइवेट कंपनी के दफ्तर में रखे गए हैं, जो अपने आप में गंभीर सुरक्षा और कानूनी सवाल खड़े करता है।

ED का Supreme Court में बड़ा बयान

गुरुवार, 15 जनवरी 2026 को ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जांच प्रक्रिया में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बाधा डाल रही हैं। ईडी ने इसे “बेहद गंभीर मामला” बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की है।

ईडी की याचिका में कहा गया है कि I-PAC परिसर में छापेमारी के दौरान जिस तरह से हालात पैदा किए गए, वह कानून के शासन के खिलाफ है। एजेंसी ने यह भी कहा कि अगर ऐसे मामलों में सख्ती नहीं दिखाई गई, तो भविष्य में केंद्रीय जांच एजेंसियों के लिए काम करना असंभव हो जाएगा।

CBI जांच की मांग, ममता बनर्जी और DGP को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल सरकार, राज्य के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस उन याचिकाओं पर जारी किया गया है, जिनमें I-PAC Raid Case में बाधा डालने के आरोपों की CBI Investigation से जांच की मांग की गई है।

कोर्ट का यह कदम बंगाल सरकार के लिए राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर बड़ा झटका माना जा रहा है।

BJP का दावा: ममता बनर्जी का नाटक फेल

बीजेपी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद यह साफ हो गया है कि ममता बनर्जी का “राजनीतिक नाटक” अब नहीं चलेगा। गौरव भाटिया ने कहा कि कोर्ट ने साफ संदेश दे दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह मुख्यमंत्री ही क्यों न हो।

बीजेपी नेताओं के मुताबिक, यह मामला सिर्फ I-PAC या एक छापेमारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति को उजागर करता है।

आने वाले दिनों में और बढ़ेगा सियासी संग्राम

विशेषज्ञों का मानना है कि I-PAC Raid Case Supreme Court में सुनवाई के साथ-साथ बंगाल की राजनीति में आने वाले दिनों में टकराव और तेज होगा। एक तरफ केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई है, तो दूसरी तरफ राज्य सरकार और टीएमसी का विरोध।

इस मामले का असर न सिर्फ बंगाल की राजनीति पर पड़ेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी ED CBI vs State Government बहस को नई धार देगा।

I-PAC Raid Case ने एक बार फिर केंद्र और राज्य के बीच टकराव को उजागर कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और एफआईआर पर रोक के बाद बीजेपी को ममता बनर्जी पर हमला करने का बड़ा मौका मिला है। अब देखना यह होगा कि आगे की कानूनी प्रक्रिया में क्या मोड़ आता है और क्या वाकई इस मामले में सीबीआई जांच का रास्ता साफ होता है।

फिलहाल इतना तय है कि यह मामला सिर्फ एक छापेमारी नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति और कानून व्यवस्था की दिशा तय करने वाला अहम मुद्दा बन चुका है।

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