हिमाचल में ड्रग्स के खिलाफ अभियान में बड़ा खुलासा, STF के 4 जवान ही निकले तस्कर, 1 करोड़ की LSD बरामद

मुख्य बिंदु:
• शिमला में 562 स्ट्रिप LSD के साथ ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश
• STF के चार पुलिसकर्मी निलंबित, जांच के घेरे में पूरी टीम
• गुरुग्राम से मुख्य सप्लायर गिरफ्तार, कई राज्यों से जुड़े तार

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PKN live l हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है, जिसने पूरे पुलिस विभाग और विशेष टास्क फोर्स यानी STF की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस टीम को नशे के कारोबार पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी दी गई थी, उसी टीम के चार सदस्य अब खुद ड्रग तस्करी के आरोपों में घिर गए हैं।

शिमला में सामने आए इस मामले में करीब एक करोड़ रुपये की कीमत की LSD ड्रग बरामद की गई है। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है और संबंधित चारों कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का खुलासा एक गुप्त सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई के दौरान हुआ। 10 मार्च को शिमला पुलिस की स्पेशल सेल ने बीसीएस क्षेत्र में दबिश देकर संदीप शर्मा और प्रिया शर्मा को गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान उनके पास से 562 स्ट्रिप LSD बरामद की गई, जिसका वजन करीब 11.570 ग्राम बताया गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस बरामद ड्रग की कीमत करीब एक करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस के मुताबिक LSD की एक स्ट्रिप की कीमत 10 हजार रुपये से भी अधिक होती है, जिससे इस कारोबार के बड़े नेटवर्क का अंदाजा लगाया जा सकता है।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी शिमला पहुंचने से पहले कुल्लू में इस ड्रग की खेप लेकर आए थे। वहां इस खेप को खपाने की योजना थी, लेकिन किसी कारणवश ऐसा नहीं हो सका। यही वह बिंदु था जहां से शक की सुई STF के कुछ कर्मियों की ओर घूमनी शुरू हुई।

जांच में जिन चार पुलिस कर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई, उनमें राजेश कुमार, समीर, नितेश और अशोक कुमार शामिल हैं। ये सभी कुल्लू जिले के अलग अलग क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं और विशेष टास्क फोर्स में तैनात थे। आरोप है कि इनकी भूमिका इस ड्रग नेटवर्क को संरक्षण देने या नजरअंदाज करने में हो सकती है।

शिमला के पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने बताया कि इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आरोपित कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस नेटवर्क में अन्य पुलिसकर्मी या अधिकारी भी शामिल हैं।

इस मामले में एक और महत्वपूर्ण गिरफ्तारी हरियाणा के गुरुग्राम से की गई है। पुलिस ने केरल निवासी नविल हेरिसन को गिरफ्तार किया है, जिसे इस पूरे नेटवर्क का मुख्य सप्लायर बताया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि LSD को किताबों के अंदर छिपाकर शिमला पहुंचाया गया था, ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके।

जांच एजेंसियों को इस नेटवर्क के तार गोवा, दिल्ली और अन्य राज्यों से जुड़े होने के संकेत भी मिले हैं। इससे यह साफ हो गया है कि यह कोई छोटा मोटा गिरोह नहीं, बल्कि एक संगठित और इंटरस्टेट ड्रग नेटवर्क है, जो लंबे समय से सक्रिय हो सकता है।

LSD, जिसका पूरा नाम Lysergic acid diethylamide है, एक बेहद खतरनाक और शक्तिशाली सिंथेटिक हैलुसिनोजेनिक ड्रग है। इसे आमतौर पर छोटे कागज के टुकड़ों यानी ब्लॉटर्स के रूप में बेचा जाता है। इसका सेवन करने पर यह मस्तिष्क में मौजूद सेरोटोनिन रिसेप्टर्स को प्रभावित करता है, जिससे व्यक्ति की सोच, भावनाएं और संवेदनाएं पूरी तरह बदल सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार LSD का सेवन मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। इससे भ्रम, डर, चिंता और लंबे समय तक मानसिक विकार भी हो सकते हैं। यही कारण है कि इसे बेहद खतरनाक ड्रग्स की श्रेणी में रखा गया है और इसकी तस्करी पर सख्त कानून लागू हैं।

इस पूरे मामले ने हिमाचल प्रदेश में चल रहे एंटी ड्रग अभियान की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जब कानून लागू करने वाली एजेंसी के ही सदस्य इस तरह के अपराध में शामिल पाए जाते हैं, तो यह पूरे सिस्टम के लिए एक गंभीर चेतावनी बन जाता है।

सरकार और पुलिस प्रशासन के लिए अब यह जरूरी हो गया है कि वे इस मामले की गहराई से जांच कराएं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें। साथ ही, सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

आम जनता के बीच भी इस घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि अगर सुरक्षा एजेंसियों के भीतर ही इस तरह की गतिविधियां चलेंगी, तो नशे के खिलाफ लड़ाई कमजोर पड़ जाएगी।

फिलहाल पुलिस इस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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