इंफ्रारेड vs इंडेक्शन चूल्हा: कीमत, बिजली खर्च और उपयोग में कौन है बेहतर विकल्प

Key Points:
• इंफ्रारेड चूल्हा 1500 से 4000 रुपये तक, इंडेक्शन 1000 से 3000 रुपये तक उपलब्ध
• इंडेक्शन में खास बर्तनों की जरूरत, इंफ्रारेड में किसी भी बर्तन का इस्तेमाल संभव
• बिजली खपत में इंडेक्शन ज्यादा एफिशिएंट, लेकिन इंफ्रारेड ज्यादा फ्लेक्सिबल


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 PKN live l नई दिल्ली: देश में एलपीजी गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों के किचन बजट पर सीधा असर डाला है। इसी वजह से अब लोग गैस के विकल्प के रूप में इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। इंडेक्शन चूल्हा पहले से ही घरों में लोकप्रिय है, लेकिन अब इंफ्रारेड चूल्हा भी एक नया और आकर्षक विकल्प बनकर सामने आया है।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन दोनों में कौन सस्ता है, किसमें ज्यादा सुविधा है और लंबे समय में कौन सा विकल्प ज्यादा किफायती साबित हो सकता है। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।इंफ्रारेड चूल्हा एक आधुनिक तकनीक पर आधारित कुकिंग डिवाइस है, जिसमें हीटिंग एलिमेंट के जरिए सीधे सतह को गर्म किया जाता है। इसकी कीमत आमतौर पर 1500 रुपये से शुरू होकर 4000 रुपये या उससे ज्यादा तक जा सकती है।

बेसिक मॉडल आपको कम कीमत में मिल जाते हैं, लेकिन अगर आप टच कंट्रोल, डिजिटल डिस्प्ले, मल्टीपल हीट सेटिंग्स और मजबूत ग्लास टॉप जैसे फीचर्स चाहते हैं, तो कीमत बढ़ जाती है।

इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी खास तरह के बर्तन की जरूरत नहीं होती। आप स्टील, एल्यूमिनियम, कांच, सिरेमिक या नॉन स्टिक जैसे लगभग सभी प्रकार के बर्तनों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

यही वजह है कि जिन घरों में पहले से अलग अलग तरह के बर्तन हैं, उनके लिए यह एक सुविधाजनक विकल्प बन जाता है।अगर कीमत की बात करें तो इंडेक्शन चूल्हा आमतौर पर इंफ्रारेड चूल्हे की तुलना में थोड़ा सस्ता पड़ता है। बाजार में इसका बेसिक मॉडल 1000 रुपये से लेकर 3000 रुपये तक आसानी से उपलब्ध है।

हालांकि इसमें एक महत्वपूर्ण शर्त होती है कि आपको इंडक्शन बेस वाले बर्तन ही इस्तेमाल करने पड़ते हैं। यानी अगर आपके घर में पहले से ऐसे बर्तन नहीं हैं, तो आपको अलग से बर्तन खरीदने का खर्च भी उठाना पड़ेगा।

इंडेक्शन चूल्हा इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तकनीक पर काम करता है, जिसमें बर्तन सीधे गर्म होता है और आसपास की सतह ज्यादा गर्म नहीं होती। इस वजह से यह बिजली की खपत के मामले में ज्यादा एफिशिएंट माना जाता है।लंबे समय में खर्च की बात करें तो इंडेक्शन चूल्हा थोड़ा ज्यादा किफायती साबित हो सकता है। इसका कारण यह है कि इसमें ऊर्जा सीधे बर्तन तक पहुंचती है, जिससे कम बिजली में खाना जल्दी बन जाता है।

वहीं इंफ्रारेड चूल्हा पहले प्लेट को गर्म करता है और फिर वह गर्मी बर्तन तक पहुंचती है। इस प्रक्रिया में थोड़ी ज्यादा बिजली खर्च हो सकती है।

हालांकि यह फर्क बहुत ज्यादा नहीं होता, लेकिन अगर रोजाना लंबे समय तक उपयोग किया जाए, तो बिजली बिल में अंतर दिखाई दे सकता है।इंफ्रारेड चूल्हा इस्तेमाल में आसान है और इसमें बर्तन बदलने की कोई परेशानी नहीं होती। लेकिन इसकी सतह काफी गर्म हो जाती है, जिससे जलने का खतरा रहता है।

दूसरी तरफ इंडेक्शन चूल्हा अपेक्षाकृत सुरक्षित होता है, क्योंकि इसमें केवल बर्तन गर्म होता है और आसपास की सतह ज्यादा गर्म नहीं होती। कई मॉडलों में ऑटो कट ऑफ और ओवरहीट प्रोटेक्शन जैसे फीचर्स भी होते हैं।अब सवाल यह है कि आखिर आपको कौन सा चूल्हा खरीदना चाहिए। इसका जवाब पूरी तरह आपकी जरूरत और बजट पर निर्भर करता है।

अगर आपके पास पहले से इंडक्शन बेस वाले बर्तन हैं और आप बिजली की बचत को प्राथमिकता देते हैं, तो इंडेक्शन चूल्हा आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।

लेकिन अगर आप बर्तनों को लेकर कोई बंधन नहीं चाहते और हर तरह के बर्तन इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो इंफ्रारेड चूल्हा ज्यादा सुविधाजनक रहेगा।कम बजट और लंबे समय की बचत को देखते हुए इंडेक्शन चूल्हा एक समझदारी भरा विकल्प माना जा सकता है। वहीं, अगर आप थोड़ी ज्यादा कीमत देकर ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी चाहते हैं, तो इंफ्रारेड चूल्हा भी अच्छा विकल्प है।

दोनों ही उपकरण आज के समय में गैस के अच्छे विकल्प के रूप में उभर रहे हैं। सही चुनाव वही होगा, जो आपके किचन की जरूरत, उपयोग और बजट के हिसाब से फिट बैठे।

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