मुख्य बिंदु:
• पाकिस्तान ने तालिबान पर भारतीय ड्रोन इस्तेमाल करने का आरोप लगाया, लेकिन सबूत नहीं दिए
• तालिबान सुप्रीम लीडर ने सख्त संदेश देते हुए कहा कि दबाव से नहीं झुकेंगे
• सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच सीजफायर उल्लंघन और बड़े हमलों की खबरें

PKN live | Afghanistan Pakistan conflict : अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। जहां एक ओर दोनों देशों के बीच सीमा पर लगातार झड़पें और हमले हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान ने इस पूरे मामले में भारत का नाम लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। पाकिस्तान का दावा है कि अफगान तालिबान द्वारा किए जा रहे हमलों में भारतीय ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि इस गंभीर आरोप के समर्थन में पाकिस्तान अब तक कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया है।
पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग DG-ISPR के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने हाल ही में एक बयान में कहा कि अफगानिस्तान से आने वाले हमलों में भारतीय तकनीक और ड्रोन का इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकता है। लेकिन इस दावे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि पाकिस्तान ने इसके समर्थन में कोई प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह बयान उसकी बढ़ती सैन्य और रणनीतिक दबाव की स्थिति को दर्शाता है। अफगानिस्तान से लगातार मिल रहे जवाबी हमलों ने पाकिस्तान को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है। ऐसे में भारत का नाम लेकर पाकिस्तान इस संघर्ष को एक बड़े क्षेत्रीय मुद्दे के रूप में पेश करने की कोशिश कर सकता है।
दूसरी तरफ, अफगानिस्तान में तालिबान नेतृत्व ने भी पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया है। ईद-उल-फितर के मौके पर कंधार में आयोजित एक बड़े जनसमूह को संबोधित करते हुए तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने बिना नाम लिए पाकिस्तान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तालिबान किसी भी सैन्य धमकी, एयरस्ट्राइक या दबाव की रणनीति से डरने वाला नहीं है।
अखुंदजादा ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि अगर तालिबान दबाव में आने वाला होता, तो वह NATO और पश्चिमी देशों के खिलाफ इतने लंबे समय तक संघर्ष नहीं कर पाता। उनके इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि तालिबान अपने मौजूदा हालात में खुद को मजबूत और आत्मविश्वासी मान रहा है।
इस बयान का समय भी बेहद अहम है क्योंकि इसी दौरान पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर तनाव लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में पाकिस्तान ने ‘ऑपरेशन गजब लिल-हक’ नाम से एक सैन्य अभियान शुरू किया था, जिसका उद्देश्य सीमा पार से हो रहे हमलों का जवाब देना बताया गया। हालांकि ईद के मौके पर इस ऑपरेशन को अस्थायी रूप से रोक दिया गया, लेकिन पाकिस्तान ने साफ किया कि यह केवल एक अस्थायी विराम है।
सीमा पर हालात अभी भी नाजुक बने हुए हैं। दोनों देशों के बीच सीजफायर उल्लंघन की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसी बीच पाकिस्तान के एक अस्पताल पर बड़ा हमला हुआ, जिसमें लगभग 400 लोगों की मौत की खबर है। इस हमले ने पूरे क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पाकिस्तान ने इस हमले के लिए भी अप्रत्यक्ष रूप से अफगान पक्ष को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की है। हालांकि इस संबंध में भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान का सूचना मंत्रालय लगातार तालिबान के आरोपों को खारिज कर रहा है। मंत्रालय का कहना है कि तालिबान जानबूझकर ऐसे आरोप लगा रहा है ताकि वह अपने कदमों को सही ठहरा सके। पाकिस्तान के अनुसार, वास्तविक स्थिति इससे अलग है और वह केवल अपनी सुरक्षा के लिए कार्रवाई कर रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह संघर्ष केवल सीमा विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब यह राजनीतिक, सामरिक और कूटनीतिक स्तर पर भी फैल चुका है। भारत का नाम इस विवाद में लाकर पाकिस्तान एक नई रणनीति अपना सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करने की कोशिश की जा सके।
हालांकि भारत की ओर से अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन यह स्पष्ट है कि इस तरह के आरोप क्षेत्रीय स्थिरता के लिए नए खतरे पैदा कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। दोनों देशों के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप और सैन्य गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में यह संघर्ष और गंभीर रूप ले सकता है।