मुख्य बिंदु:
- अफजाल अंसारी ने इजराइल को फादरलैंड कहे जाने पर जताई आपत्ति
- ईरान को भारत का पुराना मित्र बताते हुए रिश्तों में आई दूरी पर चिंता
- अमेरिका के साथ संबंधों और सरकार की नीति पर भी तीखा हमला

PKN live l मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और भारत की विदेश नीति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद Afzal Ansari ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कई विवादित और तीखे बयान दिए हैं। उन्होंने विशेष रूप से प्रधानमंत्री द्वारा इजराइल को ‘फादरलैंड’ कहे जाने के संदर्भ पर आपत्ति जताई और इसे लेकर लोगों में भ्रम और असंतोष की बात कही।
अफजाल अंसारी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में हालात संवेदनशील बने हुए हैं और भारत की कूटनीतिक स्थिति पर भी चर्चा हो रही है। उनके बयान ने एक बार फिर विदेश नीति को घरेलू राजनीति के केंद्र में ला दिया है।
इजराइल को ‘फादरलैंड’ कहने पर सवाल
Afzal Ansari ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री द्वारा इजराइल को ‘फादरलैंड’ कहे जाने की परिभाषा लोगों को समझ नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि अब तक ‘मातृभूमि’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल होता आया है, लेकिन ‘फादरलैंड’ शब्द का प्रयोग एक नई बहस को जन्म देता है।
उन्होंने यह भी कहा कि लगभग 92 लाख की आबादी वाले इजराइल को इस तरह संबोधित करना उचित नहीं है और इसे उन्होंने “चमचागीरी की हद” तक बताया। उनका कहना था कि इस तरह के बयान देश की पारंपरिक कूटनीतिक भाषा से अलग हैं और इससे भ्रम की स्थिति पैदा होती है।
ईरान को बताया पुराना मित्र
अफजाल अंसारी ने ईरान को भारत का एक पुराना और भरोसेमंद मित्र बताया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर, विशेष रूप से इस्लामी देशों की बैठकों में, ईरान ने कई बार भारत का समर्थन किया है।
उनका कहना था कि पाकिस्तान और कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर ईरान ने भारत के पक्ष में रुख अपनाया और भारत के खिलाफ प्रस्तावों को पास नहीं होने दिया। ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों में भारत और ईरान के रिश्तों में आई दूरी पर उन्होंने चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि “हमने अपने एक अच्छे मित्र को खो दिया है,” जो भारत की विदेश नीति के लिए एक बड़ा नुकसान हो सकता है।
अमेरिका के साथ संबंधों पर आलोचना
सपा सांसद ने अमेरिका के साथ भारत के संबंधों को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका लगातार भारत को अपमानित करता है और भारत उसकी बातों को स्वीकार करता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि “हम उसके तलवे चाट रहे हैं,” जो एक बेहद तीखा और विवादास्पद बयान है। उनका मानना है कि भारत को अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहना चाहिए और किसी भी देश के दबाव में नहीं आना चाहिए।
ऐतिहासिक नेताओं का किया उल्लेख
अफजाल अंसारी ने अपने बयान में भारत के पूर्व प्रधानमंत्रियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चाहे Jawaharlal Nehru हों, Indira Gandhi हों या Atal Bihari Vajpayee, किसी ने भी अमेरिका की दादागीरी को स्वीकार नहीं किया।
उनका कहना था कि यह पहली बार है जब भारत इस तरह के दबाव में नजर आ रहा है। उन्होंने इस स्थिति को देश की कूटनीतिक मजबूती के लिए चिंता का विषय बताया।
मध्य पूर्व संघर्ष और मानवीय मुद्दे
अफजाल अंसारी ने मध्य पूर्व में जारी संघर्ष पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दुनिया की दो बड़ी ताकतें अपने बल का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे मानवता को नुकसान हो रहा है।
उन्होंने फिलिस्तीन और ईरान में हो रही हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं और यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में खुशियां मनाना उचित नहीं है।
भारत की कूटनीति पर सवाल
सपा सांसद ने भारत की वर्तमान कूटनीति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ अंतरराष्ट्रीय घटनाओं में भारत की भूमिका उतनी प्रभावशाली नहीं दिख रही, जितनी पहले हुआ करती थी।
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि जब ईरान ने भारतीय जहाजों को छोड़ा था, तब उसने यह स्पष्ट किया था कि यह भारत सरकार की कूटनीति के कारण नहीं, बल्कि भारतीय जनता के समर्थन के कारण हुआ।
यह बयान भारत की विदेश नीति की प्रभावशीलता पर एक सीधा सवाल खड़ा करता है।
आर्थिक और कृषि मुद्दों से जोड़ा मामला
अफजाल अंसारी ने अमेरिका के साथ हुई कुछ डील्स को किसानों के खिलाफ बताते हुए कहा कि इससे देश के हितों को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए पूरे देश की छवि को दांव पर लगाया जा रहा है।
हालांकि, इन आरोपों पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
Afzal Ansari का यह बयान एक बार फिर यह दिखाता है कि विदेश नीति जैसे गंभीर मुद्दे भी अब घरेलू राजनीति का हिस्सा बन चुके हैं। इजराइल, ईरान और अमेरिका जैसे देशों के साथ भारत के संबंधों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी राय है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और भारत की विदेश नीति किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल, इस बयान ने राजनीतिक बहस को जरूर तेज कर दिया है।