Sunday, January 18, 2026

आजम खां और अब्दुल्ला आजम का जेल विवाद: ए कैटेगरी जेल की मांग और कंबल को लेकर बढ़ा तनाव

Share

PKN Live | समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पैन कार्ड मामले में सात साल की सजा मिलने के तुरंत बाद उन्हें और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को रामपुर जिला जेल भेज दिया गया। लेकिन जेल में प्रवेश के साथ ही दो बड़े विवाद उठ खड़े हुए—ए कैटेगरी जेल की मांग और कंबल लाने की अनुमति न मिलने पर नाराजगी।

यह पूरा मामला अब केवल एक सजा का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि Rampur Jail, A Category Jail, और prison security norms जैसे विषयों पर एक बड़ी बहस खड़ी हो गई है।

ए कैटेगरी जेल की मांग क्यों कर रहे हैं आजम खां

रामपुर जिला जेल बी कैटेगरी में आती है, जबकि आजम खां ने कोर्ट से आग्रह किया है कि उन्हें ऐसी जगह रखा जाए जहां राजनीतिक कैदियों के लिए उच्च सुरक्षा और अलग बैरक उपलब्ध हों।

A Category Jail में सामान्यतः इन सुविधाओं का प्रावधान होता है:

  • अलग और सुरक्षित बैरक

  • बेहतर सुरक्षा व्यवस्था

  • स्वास्थ्य सुविधाएँ

  • बैठने और सोने की बेहतर व्यवस्था

  • विशेष परिस्थितियों में अध्ययन-संबंधी सुविधाएँ

जेल प्रशासन के अनुसार रामपुर जेल इन मानकों पर खरी नहीं उतरती। सुरक्षा के लिहाज से भी प्रशासन ने साफ कहा कि हाई-प्रोफाइल राजनीतिक कैदियों के लिए यहां पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। इसीलिए security concern in jail को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने रिपोर्ट में संकेत दिया कि आजम खां को किसी दूसरी जेल में भेजना अधिक उचित होगा।

कंबल न मिलने पर भड़के आजम खां

सजा के बाद जब परिजन आजम खां और अब्दुल्ला के लिए घर का कंबल लेकर पहुंचे, तो जेल प्रशासन ने इसे नियमों के आधार पर अस्वीकार कर दिया। जेल नियमों के अनुसार किसी भी कैदी को घर से कंबल या निजी सामान तभी मिल सकता है जब उसके लिए कोर्ट का स्पष्ट आदेश हो।

जेल अधीक्षक के मुताबिक परिवार द्वारा लाए गए कंबल लौटा दिए गए, जिसके बाद आजम खां ने आपत्ति जताई और स्टाफ के व्यवहार को लेकर नाराजगी व्यक्त की। हालांकि इसके बाद उन्होंने जेल का दिया गया खाना खाया और रात बैरक नंबर एक में बिताई।

कंबल को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब प्रशासनिक नियमों बनाम राजनीतिक मांगों की बहस में बदल गया है। Jail Rules India, Prisoner Rights, जैसे keywords इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बना रहे हैं।

जेल प्रशासन की रिपोर्ट में क्या-क्या कहा गया

कोर्ट ने आजम खां की याचिका पर जेल प्रशासन और जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट में प्रमुख बातें थीं:

  • रामपुर जेल बी कैटेगरी की है, ए कैटेगरी की सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं।

  • सुरक्षा व्यवस्था हाई-प्रोफाइल कैदियों के लिए पर्याप्त नहीं है।

  • राजनीतिक कैदियों के लिए अलग और सुरक्षित बैरक की जरूरत होती है।

  • सुरक्षा दृष्टि से स्थानांतरण उचित हो सकता है।

अब अंतिम फैसला कोर्ट को करना है कि आजम खां और उनके बेटे को रामपुर में ही रखा जाए या Bareilly Jail, Sitapur Jail, या किसी अन्य हाई-सिक्योरिटी जेल में शिफ्ट किया जाए।

पैन कार्ड मामला: कैसे फंसे आजम और अब्दुल्ला

सात साल की सजा जिस मामले में सुनाई गई, वह 2019 में दर्ज हुआ था। आरोप है कि आजम खां ने कैबिनेट मंत्री रहते हुए अपने बेटे को कम उम्र में चुनाव लड़ाने की तैयारी में उसके लिए दूसरा PAN Card बनवाया।

कोर्ट ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए कहा कि आजम खां ने अपने पद का दुरुपयोग किया और कानून को तोड़ा। एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोनों को सात-सात साल की सजा और 50-50 हजार रुपये जुर्माना लगाया।

यह केस भाजपा नेता और शहर विधायक आकाश सक्सेना की शिकायत पर दर्ज हुआ था। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद कोर्ट ने इसे identity fraud, misuse of power, और Election Law Violation से जुड़ा गंभीर मामला माना।

जेल में आजम खां की दिनचर्या

जेल सूत्रों के अनुसार आजम खां को बैरक नंबर एक में रखा गया है। उन्होंने जेल का खाना खाया और किसी अतिरिक्त सुविधा की मांग नहीं की। सुरक्षा कारणों से बैरक के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है।

मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील होने के चलते जेल प्रशासन ने खास सतर्कता के निर्देश दिए हैं। High Security Prisoner, Political Prisoner Handling जैसे पहलू यहां प्रमुख हैं।

क्या उन्हें दूसरी जेल में भेजा जाएगा

यह अब पूरी तरह कोर्ट के अगले आदेश पर निर्भर करेगा। दो संभावनाएँ हैं:

  1. अगर कोर्ट प्रशासन की रिपोर्ट को पर्याप्त माने तो आजम खां को किसी दूसरी उच्च सुरक्षा वाली जेल में शिफ्ट किया जा सकता है।

  2. अगर कोर्ट निर्देश देता है कि सुरक्षा और सुविधाएँ बढ़ाकर उन्हें रामपुर जेल में रखा जा सकता है, तो वे यहीं रहेंगे।

प्रदेश की राजनीति पर इस फैसले की गूंज दिख रही है।
सपा समर्थकों का कहना है कि आजम खां को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि भाजपा नेता इसे कानून की जीत बता रहे हैं।

जेल विवाद ने खड़ी कर दी बड़ी राजनीतिक बहस

आजम खां और अब्दुल्ला आजम का जेल जाना अपने आप में बड़ी राजनीतिक घटना है, लेकिन ए कैटेगरी जेल की मांग और कंबल न मिलने का विवाद अब राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है।

मुख्य सवाल यह है कि क्या राजनीतिक नेताओं को जेल में विशेष सुविधाएँ दी जानी चाहिए या नियम सभी के लिए समान होने चाहिए।

अदालत का अगला निर्णय तय करेगा कि आजम खां आगे किस जेल में रहेंगे और उन्हें कौन-सी सुविधाएँ मिलेंगी। फिलहाल रामपुर जेल में उनकी हर गतिविधि प्रशासन और राजनीतिक दलों की निगरानी में है।

Read more

Local News