Sunday, January 18, 2026

लोहा नगर परिषद चुनाव में भाजपा घिरी, एक ही परिवार के 6 टिकटों से विवाद तेज

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PKN Live | महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले की लोहा नगर परिषद इस बार किसी स्थानीय मुद्दे से नहीं, बल्कि टिकट बंटवारे को लेकर लगातार सुर्खियों में है। भाजपा पर आरोप है कि उसने चुनाव में एक ही परिवार के छह सदस्यों को टिकट देकर family politics और BJP nepotism Loha के आरोपों को हवा दी है। विपक्ष इसे भाजपा की कथनी-कथनी में फर्क बताते हुए बड़ा मुद्दा बना रहा है।

तीन बड़े मोर्चे, मुकाबला दिलचस्प | Loha municipal election

लोहा नगर परिषद के चुनावों की रफ्तार इस बार तेज है। परिषद में कुल 10 वार्ड हैं और मतदाता 20 सदस्यों का चुनाव करेंगे। भाजपा, कांग्रेस, NCP और शिवसेना सहित लगभग सभी दलों ने नामांकन दाखिल कर दिए हैं।
इस बार चुनाव एक तरफा नहीं बल्कि त्रिकोणीय हो रहा है, क्योंकि कांग्रेस और VBA alliance ने मिलकर भाजपा-शिवसेना गठबंधन को चुनौती देने की रणनीति बनाई है।
स्थानीय राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह मुकाबला बाकी स्थानीय निकाय चुनावों से अलग और कहीं ज्यादा रोचक हो सकता है।

भाजपा पर परिवारवाद के आरोप | BJP family tickets

सबसे ज्यादा विवाद उस सूची को लेकर उठा है जिसमें एक ही परिवार के छह नाम दिखाई देते हैं। उम्मीदवारों में पति-पत्नी, भाई, भाभी, जीजा और भतीजे की पत्नी—सभी को टिकट मिला है।
यह परिवार गजानन सूर्यवंशी का है, जिन्हें भाजपा ने अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार बनाया है।

सूची इस प्रकार है:

  • गजानन सूर्यवंशी – अध्यक्ष पद

  • गोदावरी सूर्यवंशी – पत्नी, वार्ड 7A

  • सचिन सूर्यवंशी – भाई, वार्ड 1A

  • सुप्रिया सूर्यवंशी – भाभी, वार्ड 8A

  • युवराज वाघमारे – जीजा, वार्ड 7B

  • रीना अमोल व्यवहारे – भतीजे की पत्नी, वार्ड 3

इन नामों के सामने आते ही विपक्ष ने भाजपा पर हमला तेज कर दिया और इसे खुला nepotism in BJP बताते हुए कहा कि पार्टी खुद को “विकास और पारदर्शिता” का प्रतीक बताती है, मगर टिकट बांटने में रिश्तेदारी को प्राथमिकता देती है।

भाजपा की सफाई: स्थानीय नेताओं का फैसला | Loha politics controversy

टिकट बंटवारे पर उठे सवालों के जवाब में भाजपा के स्थानीय नेता किरण पाटिल ने दावा किया कि यह निर्णय पूरी तरह स्थानीय स्तर पर लिया गया था।
उन्होंने कहा कि यह चुनाव स्थानीय निकाय का है, जहां स्थानीय समीकरण और परिवारों की पकड़ ही निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि सूर्यवंशी परिवार क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय है और इसकी सामाजिक पकड़ मजबूत है। यही कारण है कि टिकट चयन में उनके नाम पर सहमति बनी।

हालांकि, विपक्ष के नेता इस सफाई को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि भाजपा चाहे जितनी सफाई दे, लेकिन BJP faces accusations of nepotism जैसे आरोप उससे पीछा नहीं छोड़ेंगे।

अशोक चव्हाण का प्रभाव और भाजपा की रणनीति

लोहा में भाजपा का अभियान पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद अशोक चव्हाण के नेतृत्व में चल रहा है।
उनके भाजपा में आने के बाद जिले में पार्टी की पकड़ काफी बढ़ गई है।
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा को उम्मीद है कि चव्हाण का प्रभाव मतदान के समय उसकी ताकत बढ़ाएगा।

लेकिन विरोधी दलों का आरोप है कि भाजपा को भले ही बड़ा नेता मिल गया हो, पर टिकट बंटवारे में संतुलन बनाने में पार्टी विफल रही।
इस विवाद ने भाजपा की रणनीति को मुश्किल में डाल दिया है।

कांग्रेस और VBA का गठबंधन बना चुनौती | Congress VBA alliance

11 नवंबर को कांग्रेस ने वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के साथ गठबंधन की घोषणा कर दी थी।
कांग्रेस सांसद रवि वसंतराव चव्हाण ने कहा कि यह साझेदारी अभी नांदेड़ तक सीमित है, लेकिन आगे और भी राजनीतिक संभावनाएँ खुल सकती हैं।
कांग्रेस का दावा है कि यह गठबंधन भाजपा-शिवसेना का मुकाबला करने में अहम भूमिका निभाएगा, खासकर ऐसे माहौल में जब भाजपा पर BJP nepotism Loha जैसे आरोप लग रहे हैं।

चुनाव का फोकस बदल गया | Maharashtra local polls

आमतौर पर लोहा नगर परिषद चुनावों में पानी, सड़क, स्वच्छता और स्थानीय विकास कार्य ही मुख्य मुद्दे होते हैं।
लेकिन भाजपा के टिकट बंटवारे ने इस बार चुनाव को पूरी तरह राजनीतिक विवादों के इर्द-गिर्द खड़ा कर दिया है।
विपक्ष इसे “परिवार का कब्जा” बताकर जनता के बीच प्रचारित कर रहा है, जबकि भाजपा इसे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की योग्यता और स्थानीय पकड़ से जोड़कर देख रही है।

स्थानीय लोगों का मिश्रित रुख देखने को मिल रहा है।
कुछ मतदाता कहते हैं कि विकास महत्वपूर्ण है, चाहे उम्मीदवार किसी भी परिवार से हो।
दूसरी ओर, कई लोग एक ही परिवार के छह नाम देखकर असहज हैं और मानते हैं कि इससे स्थानीय राजनीति पर किसी एक परिवार का दबदबा बन सकता है।

नतीजे क्या संदेश देंगे?

लोहा नगर परिषद का यह चुनाव सिर्फ एक स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं रह गया है।
यह अब एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने वाला चुनाव बन गया है—क्या जनता विकास पर वोट देगी या परिवारवाद के खिलाफ खड़ी होगी?
या फिर भाजपा के उम्मीदवारों की स्थानीय पकड़ और अशोक चव्हाण का प्रभाव पार्टी को फायदा पहुंचाएगा?

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