PKN Live | कोडीन सिरप मामले को लेकर सहारनपुर से जुड़ी एक अहम कानूनी खबर सामने आई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले में दो आरोपी भाइयों को फिलहाल राहत देते हुए सशर्त अंतरिम जमानत मंजूर कर ली है। जमानत पाने वाले आरोपियों के नाम विभोर राणा और विशाल सिंह बताए गए हैं, जो सहारनपुर जिले के निवासी हैं।
हाईकोर्ट ने यह राहत 5 जनवरी 2026 तक के लिए दी है। इसी तारीख को मामले की अगली सुनवाई तय की गई है। अदालत ने साफ तौर पर कहा है कि यह राहत स्थायी नहीं है और दोनों आरोपियों को जांच में पूरा सहयोग करना होगा। यदि वे जांच से बचने की कोशिश करते हैं या पुलिस द्वारा बुलाए जाने पर उपस्थित नहीं होते हैं, तो दी गई राहत पर दोबारा विचार किया जा सकता है।
यह आदेश जस्टिस करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ ने जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
कोर्ट ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह स्पष्ट किया कि अंतरिम जमानत देना किसी भी तरह से आरोपियों को दोषमुक्त घोषित करना नहीं है। कोर्ट का कहना था कि जांच अभी जारी है और जांच एजेंसी को अपना काम स्वतंत्र रूप से करने दिया जाना चाहिए। हालांकि, इस स्तर पर आरोपियों को हिरासत में रखे जाने की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती।
अदालत ने यह भी कहा कि दोनों याचिकाकर्ता जांच अधिकारी के बुलाने पर हर बार उपस्थित होंगे और किसी भी तरह से जांच को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेंगे।
Codeine Syrup Case क्यों है संवेदनशील
कोडीन सिरप से जुड़े मामलों को आमतौर पर गंभीर माना जाता है। वजह यह है कि यह दवा मेडिकल उपयोग के लिए होती है, लेकिन कई मामलों में इसका इस्तेमाल नशे के रूप में किया जाता है। यही कारण है कि Codeine Syrup Case अक्सर NDPS Act के तहत दर्ज किए जाते हैं।
इस मामले में भी जांच एजेंसी की ओर से आरोप लगाए गए थे कि नियमों के विपरीत कोडीन युक्त सिरप से जुड़ी गतिविधियां सामने आई हैं। हालांकि, बचाव पक्ष की ओर से कोर्ट में यह दलील दी गई कि आरोप बढ़ा-चढ़ाकर लगाए गए हैं और वास्तविक तथ्यों की जांच अभी पूरी नहीं हुई है।
Saharanpur News में क्यों चर्चा में है मामला
चूंकि आरोपी सहारनपुर जिले से जुड़े हैं, इसलिए यह मामला Saharanpur News और स्थानीय अपराध समाचारों में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय स्तर पर इस केस को लेकर लोगों की अलग-अलग राय है। कुछ लोगों का मानना है कि इस तरह के मामलों में कानून को सख्ती बरतनी चाहिए, वहीं कुछ लोग इसे जांच पूरी होने से पहले गिरफ्तारी से जोड़कर देख रहे हैं।
Lucknow Bench का रुख
Allahabad High Court Lucknow Bench ने इस मामले में संतुलित रुख अपनाया। कोर्ट ने न तो जांच एजेंसी के अधिकारों में हस्तक्षेप किया और न ही आरोपियों को पूरी तरह खुली छूट दी। अदालत ने साफ कहा कि जमानत की शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।
हाईकोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि अगली सुनवाई में जांच की स्थिति पर गौर किया जाएगा और उसी आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा।
जमानत के साथ लगी शर्तें
कोर्ट ने अंतरिम जमानत देते हुए कुछ स्पष्ट शर्तें तय की हैं। इनमें प्रमुख रूप से यह निर्देश दिए गए हैं कि आरोपी:
जांच अधिकारी के सामने समय पर उपस्थित होंगे
किसी भी गवाह से संपर्क करने या उन्हें प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे
मामले से जुड़े साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे
कानूनी प्रक्रिया में बाधा नहीं डालेंगे
इन शर्तों का उल्लंघन होने पर जमानत स्वतः खतरे में पड़ सकती है।
Legal News India में अहम क्यों
यह मामला Legal News India के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसकी वजह यह है कि हाल के समय में कोडीन सिरप से जुड़े मामलों में अदालतों का रुख आमतौर पर सख्त रहा है। ऐसे में इस केस में अंतरिम जमानत मिलना यह दर्शाता है कि कोर्ट हर केस को उसके तथ्यों के आधार पर देख रही है।
अगली सुनवाई पर टिकी नजर
अब इस पूरे मामले में अगला अहम पड़ाव 5 जनवरी 2026 होगा। इसी दिन हाईकोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि अंतरिम राहत को आगे बढ़ाया जाए या नहीं। जांच एजेंसी से भी उम्मीद की जा रही है कि वह तब तक अपनी रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखेगी।
कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि जांच के दौरान कोई नया या गंभीर तथ्य सामने आता है, तो अदालत का रुख बदल सकता है। वहीं, यदि आरोपी लगातार जांच में सहयोग करते रहते हैं, तो उन्हें आगे भी राहत मिल सकती है।
कुल मिलाकर, Codeine Syrup Case में इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह आदेश एक सामान्य लेकिन महत्वपूर्ण न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। कोर्ट ने जांच की गंभीरता को नजरअंदाज किए बिना आरोपियों को अस्थायी राहत दी है। अब यह देखना होगा कि आने वाले महीनों में जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और अगली सुनवाई में अदालत क्या फैसला लेती है।
यह मामला न सिर्फ सहारनपुर बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में कानून और अपराध से जुड़ी चर्चाओं में अपनी जगह बनाए हुए है।