Dear Death Movie Review लिखते वक्त सबसे पहले यही समझ में आता है कि यह फिल्म हर किसी के लिए बनी ही नहीं है। और शायद इसे यही होना था। Dear Death उन फिल्मों में से नहीं है जो आपको पकड़ने के लिए मेहनत करें। यह आपको invite भी नहीं करती। आप खुद आते हो, बैठते हो, और अगर थोड़ा रुक गए तो फिल्म खुलने लगती है।

आज के टाइम में ज़्यादातर फिल्में शोर करती हैं। कैमरा हिलता है, म्यूजिक चिल्लाता है, और कहानी बार-बार remind कराती है कि “देखो, यहाँ important scene है।” Dear Death ऐसा कुछ नहीं करती। यह चुपचाप चलती है। कई बार इतना चुप कि आपको खुद से सवाल करना पड़ता है कि क्या मैं सही मूड में यह फिल्म देख रहा हूँ?
कहानी, जो कहानी जैसी नहीं लगती
अगर कोई पूछे कि Dear Death की कहानी क्या है, तो सीधा जवाब देना मुश्किल है। क्योंकि यह फिल्म एक लाइन की story पर नहीं टिकी। यह एक feeling पर टिकी है। एक ऐसे इंसान की हालत पर, जो बाहर से ठीक दिखता है, लेकिन अंदर से कहीं अटका हुआ है।
यहाँ मौत किसी डरावनी चीज़ की तरह नहीं आती। Dear Death में मौत एक सोच है, एक constant presence। जैसे कोई पुराना ख्याल जो बार-बार लौट आता है। फिल्म इसे न dramatic बनाती है, न poetic। बस रहने देती है।
यही वजह है कि कई दर्शकों को यह फिल्म boring लगेगी। क्योंकि यहाँ “घटना” कम है और “स्थिति” ज्यादा है।
Dear Death Movie Review: फिल्म असल में किस बारे में है
यह फिल्म मौत से ज़्यादा जिंदगी की थकान के बारे में है। उस थकान के बारे में जो अचानक नहीं आती, बल्कि धीरे-धीरे जमा होती है। जब इंसान सब कुछ करता रहता है, लेकिन अंदर से disconnected महसूस करता है।
Dear Death किसी moral lesson की तरह पेश नहीं होती। यह यह नहीं कहती कि जिंदगी अच्छी है या बुरी। यह बस दिखाती है कि कई बार इंसान बीच में अटक जाता है। न पूरी तरह जी पाता है, न मरने के बारे में खुलकर सोच पाता है।
फिल्म का यही हिस्सा सबसे uncomfortable है, क्योंकि यह बहुत real लगता है।
निर्देशन: सब्र रखने वाला काम
Dear Death movie review में अगर निर्देशन की बात न की जाए, तो review अधूरा रहेगा। इस फिल्म का direction बहुत patient है। कई सीन ऐसे हैं जहाँ normal फिल्मों में cut हो जाता, लेकिन यहाँ कैमरा रुका रहता है।
यहाँ director दर्शक पर भरोसा करता है। वह यह assume नहीं करता कि audience को हर बात spoon-feed करनी है। कई बार यह approach काम करता है, और कई बार थोड़ा भारी भी लगता है।
लेकिन एक बात साफ है — यह फिल्म जल्दी में नहीं है। और जो फिल्म जल्दी में नहीं होती, वह हर किसी को पसंद नहीं आती।
अभिनय: ज़्यादा कोशिश नहीं, ज़्यादा असर
Dear Death का acting style बहुत quiet है। यहाँ कोई बड़ा emotional outburst नहीं है। main character बहुत कम बोलता है। reactions भी muted हैं। लेकिन यही restraint फिल्म को believable बनाता है।
असल जिंदगी में भी लोग हर वक्त dramatic नहीं होते। कई बार सबसे बड़ा दर्द बिना आवाज़ के चलता है। इस फिल्म का अभिनय उसी reality के करीब लगता है।
Support characters भी ऐसे ही हैं। कोई flashy performance नहीं, बस presence है।
कैमरा, रंग और खालीपन
Dear Death visually attractive फिल्म नहीं है, और शायद intentionally नहीं है। फ्रेम्स में खाली जगह है। रंग dull हैं। कई shots थोड़े uncomfortable लगते हैं।
लेकिन यही discomfort फिल्म का हिस्सा है। यह फिल्म आपको cozy feel नहीं देना चाहती। यह चाहती है कि आप थोड़ा uneasy रहें।
Dear Death movie music की बात करें तो म्यूजिक बहुत कम इस्तेमाल हुआ है। कई scenes पूरी तरह silence पर टिके हैं। और यह silence loud लगता है।
पहले कुछ देर तक आपको लगेगा कि कुछ missing है, फिर समझ आएगा कि कुछ भी missing नहीं है।
रफ्तार: सबसे बड़ा issue, सबसे बड़ी ताकत
यह बात साफ है कि Dear Death स्लो फिल्म है। बहुत स्लो। और यह बात इसे कमजोर भी बनाती है और मजबूत भी।
अगर आप फिल्म देखते वक्त बार-बार time check करते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए torture बन सकती है। लेकिन अगर आप खुद को इसके rhythm में छोड़ देते हैं, तो यह अलग तरह से काम करती है।
यह फिल्म आपको entertain नहीं करती। यह आपको engage करती है — लेकिन अपने तरीके से।
Dear Death Movie Review और audience reaction
इस तरह की फिल्मों में reaction हमेशा divided होता है। कुछ लोग इसे masterpiece कहेंगे, कुछ लोग waste of time। और दोनों अपनी जगह सही होंगे।
Dear Death का असर mood पर depend करता है। यह वह फिल्म नहीं है जिसे आप किसी भी दिन, किसी भी हाल में देख लें। यह फिल्म सही वक्त मांगती है।
कमियाँ, जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता
फिल्म में कुछ scenes जरूरत से ज्यादा खिंचे हुए लगते हैं। कुछ जगह ऐसा लगता है कि director खुद भी unsure है कि next beat क्या हो।
कई viewers को इसका end अधूरा लगेगा। कोई clear closure नहीं मिलता। कोई साफ जवाब नहीं। लेकिन शायद यही इसका point है।
आखिर में: Dear Death Movie Review का निचोड़
Dear Death कोई loud statement नहीं है। यह एक low voice में कही गई बात है। यह फिल्म खत्म होने के बाद भी थोड़ी देर आपके साथ रहती है। आप सोचते रहते हो कि इसमें ऐसा क्या था — और शायद वही इसका असर है।
अगर आप ऐसी फिल्म ढूँढ रहे हैं जो सवाल पूछे, answers न बेचे, तो Dear Death देखने लायक है। लेकिन अगर आप clarity चाहते हैं, speed चाहते हैं, तो यह फिल्म आपको frustrate कर सकती है। pknlive