Sunday, January 18, 2026

‘जो चल नहीं सकता, वो दंगों का मास्टरमाइंड कैसे?’ Delhi Masjid Violence Case में 20 गिरफ्तार

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PKN Live | दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में Delhi Masjid Violence Case को लेकर हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस का दावा है कि सभी आरोपियों की पहचान CCTV Footage और वायरल वीडियो के आधार पर की गई है, जबकि आरोपियों के परिवार इसे “बिना सबूत की गिरफ्तारी” बता रहे हैं।

7 जनवरी को घटना के बाद ही पुलिस ने पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और पुलिस पर हमले के आरोप में आरिब (बीच में नीली शर्ट में) समेत 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था।

इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा 36 वर्षीय मोहम्मद इमरान की गिरफ्तारी को लेकर है। परिवार का सवाल है कि जो व्यक्ति पीठ की गंभीर बीमारी के चलते ठीक से चल भी नहीं सकता, वह दंगे का मास्टरमाइंड कैसे हो सकता है।

Turkmen Gate Violence: मोहम्मद इमरान की कहानी

तुर्कमान गेट के पास रहने वाले मोहम्मद इमरान पेशे से कचौरी बेचते हैं। 8 जनवरी की सुबह वे रोज की तरह दुकान गए थे, लेकिन शाम को घर नहीं लौटे। परिवार ने जब तलाश शुरू की, तो करीब दो घंटे बाद पड़ोसियों ने बताया कि उन्हें पुलिस ले गई है।

परिजनों के मुताबिक, थाने पहुंचने पर पता चला कि इमरान पर Riot Case, पथराव, पुलिस पर हमला, हत्या की कोशिश और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

इमरान के परिवार का कहना है कि उन्हें कई सालों से पीठ की बीमारी है। वे न झुक सकते हैं, न तेजी से चल सकते हैं। ऐसे में दंगे और पत्थरबाजी में शामिल होने का आरोप उन्हें पूरी तरह झूठा लगता है।

7 जनवरी को क्या हुआ था: Faiz-e-Ilahi Masjid Incident

7 जनवरी की रात दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में Faiz-e-Ilahi Masjid के आसपास अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। दिल्ली नगर निगम की टीम ने हाईकोर्ट के आदेश के तहत बुलडोजर और जेसीबी मशीनों से मस्जिद के पास बने एक बंद बारात घर और प्राइवेट क्लिनिक को ध्वस्त किया।

कार्रवाई के दौरान अचानक भीड़ इकट्ठा हो गई और पुलिस व एमसीडी स्टाफ पर पथराव शुरू हो गया। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। इस हिंसा में करीब 5 पुलिसकर्मी घायल हुए।

Delhi Police Arrests: 20 लोग हिरासत में

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस हिंसा के सिलसिले में अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी मुस्लिम समुदाय से हैं और ज्यादातर तुर्कमान गेट व चांदनी महल इलाके के निवासी हैं।

गिरफ्तार लोगों में मोहम्मद फैज, नावेद, शाहनवाज आलम, उबैदुल्लाह उर्फ उबैद, मोहम्मद इमरान उर्फ राजू, अदनान, मोहम्मद शहजाद, आमिर हमजा, समीर हुसैन, काशिफ, अफ्फान, कैफ, अतहर, आदिल, फहीम उर्फ सानू सहित अन्य नाम शामिल हैं।

परिवारों के आरोप: बिना सबूत गिरफ्तारी

हमने इस केस में आरोपी बनाए गए लोगों के परिवारों से संपर्क करने की कोशिश की। ज्यादातर परिवार डरे हुए हैं और कैमरे पर बात करने से इनकार कर रहे हैं। केवल दो परिवारों ने अपनी बात खुलकर रखी।

मोहम्मद इमरान की पत्नी सुमैरा का कहना है कि हिंसा के समय इमरान घर पर ही थे। वे रात करीब एक बजे दूध और बच्चों का सामान लेने नीचे गए थे और कुछ ही देर में वापस लौट आए थे।

सुमैरा ने पास की दुकान की CCTV Footage दिखाते हुए कहा कि वीडियो में इमरान आराम से चलते हुए नजर आ रहे हैं। अगर वे किसी हिंसा में शामिल होते, तो इतनी सामान्य स्थिति में वापस नहीं आ सकते थे।

उनका आरोप है कि मीडिया में इमरान को “मास्टरमाइंड” बताया जा रहा है, जबकि पुलिस ने थाने में सिर्फ इतना कहा कि वे किसी वीडियो में दिख रहे हैं।

Judicial Custody: 12 दिन की हिरासत

9 जनवरी को मोहम्मद इमरान समेत 8 आरोपियों को दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस ने कोर्ट में कहा कि आरोपियों को CCTV फुटेज में देखा गया है और ग्राउंड पर मौजूद स्टाफ ने उनकी पहचान की है।

इसमें सुमैरा सीसीटीवी फुटेज में अपने पति की तस्वीर दिखा रही हैं, जिसमें वो सामान लेकर घर लौट रहे हैं।

वहीं आरोपियों के वकीलों ने दलील दी कि Attempt to Murder (BNS Section 109) जैसी गंभीर धारा गलत तरीके से लगाई गई है, क्योंकि पुलिस को आई चोटें मामूली थीं। कोर्ट ने कहा कि इन तथ्यों पर फैसला ट्रायल के दौरान होगा और सभी आरोपियों को 12 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

Masjid Land Dispute: कोर्ट का आदेश और विवाद

यह पूरा मामला मस्जिद के पास जमीन विवाद से जुड़ा है।
12 नवंबर 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट ने मस्जिद के पास निर्माण को अवैध बताते हुए एमसीडी को तीन महीने में हटाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने माना कि करीब 39,000 वर्गमीटर क्षेत्र में अवैध कब्जा है।

मस्जिद कमेटी ने दावा किया कि जमीन वक्फ की है और आदेश के खिलाफ रिट याचिका दायर की। दिसंबर में एमसीडी ने कहा कि 0.195 एकड़ के अलावा बाकी जमीन के दस्तावेज न तो दिल्ली वक्फ बोर्ड और न ही मस्जिद कमेटी दे सकी।

6 जनवरी 2026 को हाई कोर्ट ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय, एमसीडी और दिल्ली वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी किया, लेकिन अतिक्रमण हटाने के आदेश पर रोक नहीं लगाई।

Police Version: CCTV और सोशल मीडिया की जांच

सेंट्रल दिल्ली के निधिन वालसन ने कहा कि गिरफ्तार किए गए सभी लोग पत्थरबाजी में शामिल थे। उनकी पहचान CCTV कैमरों, वायरल वीडियो और मौके पर मौजूद स्टाफ के बयानों के आधार पर की गई है।

पुलिस सोशल मीडिया पर भी नजर रखे हुए है। उन अकाउंट्स और व्हाट्सएप ग्रुप्स की जांच की जा रही है, जिन्होंने दावा किया था कि मस्जिद गिराई जा रही है और लोगों को मौके पर आने के लिए उकसाया गया।

डीसीपी के मुताबिक, अब तक करीब 10 ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान की गई है। सबूत मिलने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

वकीलों का सवाल: वीडियो कोर्ट में क्यों नहीं?

कुछ आरोपियों की ओर से पैरवी कर रहे वकील दानिश अली ने सवाल उठाया कि अगर पत्थरबाजी के वीडियो मौजूद हैं, तो पुलिस ने उन्हें अब तक कोर्ट में पेश क्यों नहीं किया।

उनका कहना है कि आंसू गैस के कारण कई लोग अपने घरों से बाहर निकले और कैमरों में दिख गए। सिर्फ कैमरे में दिखने भर से किसी को दंगाई नहीं कहा जा सकता।

Delhi Masjid Violence Case अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रहा, बल्कि यह पुलिस कार्रवाई, नागरिक अधिकार और न्यायिक प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर रहा है। एक तरफ पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर गिरफ्तारी का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ परिवार अपने परिजनों को बेगुनाह बता रहे हैं।

आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि अदालत में पेश किए जाने वाले सबूत इस मामले की दिशा किस ओर मोड़ते हैं। फिलहाल 20 गिरफ्तारियों के साथ यह मामला दिल्ली की राजनीति, प्रशासन और न्याय व्यवस्था के लिए एक बड़ी परीक्षा बन चुका है।

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