Sunday, January 18, 2026

Delhi NCR Pollution : प्रदूषण से हेल्थ इमरजेंसी, AIIMS डॉक्टरों ने दी कड़ी चेतावनी

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PKN Live | Delhi NCR Pollution लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है और इसका असर अब सीधे लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। AIIMS के डॉक्टरों ने मौजूदा हालात को Health Emergency बताते हुए कहा है कि बढ़ता Air Quality Index (AQI) आम लोगों और मरीजों दोनों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। मंगलवार को दिल्ली का AQI 374 दर्ज किया गया, जो “very poor air quality”, “hazardous pollution” जैसी श्रेणियों में आता है और यह स्तर लंबे समय तक रहने पर फेफड़ों के लिए बेहद नुकसानदायक साबित होता है।

AIIMS में बढ़े मरीज, पुरानी बीमारियां फिर उभर रहीं

AIIMS के Pulmonary Medicine Department के प्रमुख डॉ. अनंत मोहन के अनुसार पिछले कुछ दिनों में सांस की समस्या वाले मरीजों की संख्या 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है। कई ऐसे मरीज जिनकी दमा या ब्रोंकाइटिस लंबे समय से नियंत्रण में थी, अब गंभीर लक्षणों के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। पहले सामान्य खांसी जहां तीन-चार दिनों में ठीक हो जाती थी, वहीं अब वही खांसी तीन से चार हफ्तों तक बनी हुई है। बच्चों और बुजुर्गों के बीच “respiratory problems”, “pollution-related illnesses” तेजी से बढ़ रही हैं।

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यह प्रदूषण न केवल बीमारों को बल्कि पूरी तरह से स्वस्थ व्यक्तियों को भी प्रभावित कर रहा है। लगातार खराब हवा में रहने से फेफड़ों पर सीधा असर हो रहा है, जिससे सामान्य व्यक्ति भी खांसी, सीने में जकड़न और सांस फूलने की शिकायत कर रहे हैं।

Delhi NCR Pollution : हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने की जरूरत

डॉ. मोहन का कहना है कि जब तक सरकार, संस्थाएं और लोग मिलकर इसे स्वास्थ्य आपातकाल की तरह नहीं देखेंगे, तब तक स्थितियां सुधरना मुश्किल है। Delhi-NCR में AQI कई दिनों से 300 से 400 के बीच बना हुआ है, जबकि डॉक्टरों का कहना है कि 0 से 50 AQI को ही “good air quality” माना जाता है। मौजूदा हालात सीधे खतरे का संकेत देते हैं और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं।

ग्रेटर नोएडा सबसे प्रदूषित शहर, NCR की हवा हुई जहरीली

मंगलवार को Greater Noida देश का सबसे polluted city रहा, जहां AQI 454 दर्ज किया गया। Noida का AQI 390 और Ghaziabad का 434 रहा, जो “severe pollution category” में आता है। फरीदाबाद और गुरुग्राम में AQI क्रमशः 212 और 272 दर्ज किया गया। ये भी स्वास्थ्य की दृष्टि से असुरक्षित हैं और लंबे समय तक इस स्तर पर रहने से फेफड़ों की क्षमता पर गहरा असर पड़ता है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

Delhi NCR Pollution पर सुनवाई के दौरान Supreme Court ने कहा कि पर्यावरण कानूनों को कमजोर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा परियोजनाओं को पूर्वव्यापी पर्यावरणीय मंजूरी देने के आदेश पर रोक लगाई और स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की ढील गंभीर परिणाम दे सकती है। कोर्ट ने इसे National Health Concern बताते हुए कड़े कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया।

प्रदूषण में रहने के अवधि अनुसार स्वास्थ्य पर प्रभाव

डॉक्टरों के अनुसार “particulate matter”, “PM2.5”, “toxic air exposure” का असर व्यक्ति-व्यक्ति पर अलग होता है, लेकिन अवधि के अनुसार जोखिम कुछ इस प्रकार बढ़ता है:

1 से 3 दिन

गले, आंख और नाक में जलन
हल्का सिरदर्द
थकान और हल्की सांस लेने में दिक्कत

4 से 7 दिन

तेज और लगातार खांसी
अस्थमा के मरीजों में स्थिति बिगड़ना
ब्लड प्रेशर बढ़ना

8 से 15 दिन

सांस फूलना
ब्रोंकाइटिस जैसे लक्षण
बच्चों की फेफड़ों की ग्रोथ प्रभावित होना

30 दिन या उससे अधिक

दमा स्थायी रूप से खराब हो सकता है
बच्चों की फेफड़ों की क्षमता 10–20 प्रतिशत तक कम हो सकती है

एन-95 मास्क पहनना अनिवार्य

AIIMS के डॉक्टरों ने सलाह दी है कि लोग बाहर निकलते समय N-95 Mask पहनना बिल्कुल न भूलें। सामान्य मास्क हवा में मौजूद PM2.5 कणों को रोक नहीं पाते, जबकि N-95 मास्क काफी हद तक सुरक्षा देता है। विशेषज्ञों ने कहा कि “air pollution precautions” को रोजमर्रा की आदत बनाना होगा।

अगर संभव हो तो दिसंबर तक NCR से दूर रहें

AIIMS के पूर्व विशेषज्ञ डॉ. गोपी चंद खिलनानी का कहना है कि प्रदूषण और सर्दी का मेल फेफड़ों की बीमारी को कई गुना बढ़ा देता है। ऐसे में यदि संभव हो तो दिसंबर के अंत तक Delhi-NCR से कुछ समय के लिए दूर जाना सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है। खासकर दमा और सांस की समस्या वाले लोगों को सावधानी बरतनी होगी।

डॉक्टरों की अंतिम चेतावनी

डॉ. अनंत मोहन ने कहा कि प्रदूषण के कारण अब स्वस्थ लोग भी लगातार बीमार पड़ रहे हैं। कई मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ रहा है और कुछ मामलों में स्थिति गंभीर होने के कारण मौत तक हो रही है। उन्होंने कहा कि स्थिति बेहद गंभीर है और इसे हल्के में लेने की गलती लोगों की सेहत पर भारी पड़ सकती है।

Delhi-NCR Pollution अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि एक गंभीर Public Health Emergency बन चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार अब समय आ गया है जब सरकार और लोग मिलकर ऐसे मजबूत कदम उठाएँ, जो हवा की गुणवत्ता में स्थायी सुधार ला सकें।

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