PKN Live | गाजियाबाद में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े स्लीपर सेल नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़ा बताया जा रहा है। यह नेटवर्क सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को अपने जाल में फंसा रहा था और उन्हें देश-विरोधी गतिविधियों की ओर धकेलने की कोशिश कर रहा था।
इस मामले में गाजियाबाद पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों जैसे RAW, IB और ATS ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा 14 से अधिक लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है, जिनमें कुछ कूरियर नेटवर्क से जुड़े लोग भी शामिल हैं।
मुंबई कनेक्शन ने बढ़ाई चिंता
जांच में एक महिला का नाम सामने आया है, जो पहले मुंबई पुलिस की मुखबिर रह चुकी थी, लेकिन बाद में ISI के संपर्क में आ गई। उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए युवाओं को जोड़कर एक स्लीपर सेल नेटवर्क खड़ा किया।
मुख्य आरोपी सुहेल के साथ मिलकर उसने 150 से ज्यादा युवाओं को एक ग्रुप में जोड़ा और उन्हें धीरे-धीरे कट्टर विचारधारा की ओर प्रभावित किया।
कट्टर वीडियो से किया जा रहा था ब्रेनवॉश
जांच एजेंसियों के मुताबिक, युवाओं को भड़काने के लिए आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के भाषणों और वीडियो का इस्तेमाल किया जा रहा था। इन वीडियो के जरिए युवाओं को देश-विरोधी सोच की ओर प्रेरित किया गया।
करीब 160 से अधिक सोशल मीडिया यूजर्स ऐसे पाए गए हैं, जो संदिग्ध कंटेंट को शेयर और प्रमोट कर रहे थे। एजेंसियां अब इनके सोशल मीडिया रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही हैं।
युवाओं को निशाना बनाने की रणनीति
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को निशाना बनाया गया। उन्हें लालच देकर और मानसिक रूप से प्रभावित कर इस नेटवर्क का हिस्सा बनाया गया।
यह रणनीति दर्शाती है कि आतंकवाद अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज के भीतर ही जड़ें जमाने की कोशिश कर रहा है।
सोशल मीडिया बना नया खतरा
यह घटना बताती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म अब आतंकियों के लिए नया हथियार बन चुके हैं। व्हाट्सएप ग्रुप, फेक वीडियो और ऑनलाइन संपर्क के जरिए युवाओं को आसानी से प्रभावित किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर सुरक्षा को और मजबूत करने की जरूरत है, साथ ही सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ाना भी जरूरी हो गया है।
क्या सीख मिलती है इस घटना से
यह मामला देश के लिए एक चेतावनी है। जरूरत है कि युवा सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि से दूर रहें। अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों को भी इस दिशा में जागरूकता फैलानी चाहिए।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को डिजिटल नेटवर्क पर सख्त निगरानी रखनी होगी, ताकि इस तरह की साजिशों को समय रहते रोका जा सके।
गाजियाबाद का यह मामला सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक बड़ी चेतावनी है। बदलते समय के साथ आतंकवाद के तरीके भी बदल रहे हैं, और अब इसका मुकाबला करने के लिए नई रणनीति और जागरूकता दोनों जरूरी हैं।

लेखक: ललित चौधरी (एडिटर)
श्रृंखला: भारत का बदलता शासन