PKN Live | Ghaziabad Sword Distribution Case:गाजियाबाद के शालीमार गार्डन इलाके में हुआ तलवार वितरण का मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। शुरुआत में यह घटना एक स्थानीय कार्यक्रम तक सीमित मानी जा रही थी, लेकिन जैसे ही इसके वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, पूरा मामला कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बन गया। Ghaziabad sword distribution case को लेकर पुलिस की कार्रवाई और उसके बाद दिए गए बयानों ने स्थिति को और संवेदनशील कर दिया है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुछ दिन पहले शालीमार गार्डन स्थित हिंदू रक्षा दल के कार्यालय पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। आयोजकों की ओर से इसे आत्मरक्षा से जुड़ा कार्यक्रम बताया गया। लेकिन कार्यक्रम के दौरान जिस तरह से तलवारें बांटी गईं और भीड़ सड़क तक फैल गई, उसने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी।
वीडियो में साफ दिखाई देता है कि बड़ी संख्या में लोग मौके पर मौजूद थे। कुछ लोग हाथों में तलवारें लेकर नारे लगाते नजर आए। भीड़ बढ़ने के कारण सड़क पर लंबा जाम लग गया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वाहन फंस गए थे और कुछ लोग डर के कारण वहां से हटते दिखे। एंबुलेंस और आम राहगीरों को भी निकलने में परेशानी हुई। यही वजह रही कि मामला सीधे law and order Ghaziabad से जुड़ गया।
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने तत्काल संज्ञान लिया। शालीमार गार्डन थाने में तैनात पुलिसकर्मी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर में हिंदू रक्षा दल की अध्यक्ष पिंकी चौधरी समेत 16 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 25 से 30 अन्य को अज्ञात आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं और आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम 1932 के तहत मामला दर्ज किया है।
इसके बाद पुलिस ने इलाके में अतिरिक्त फोर्स तैनात कर स्थिति को संभाला और कार्यक्रम को समाप्त कराया। कार्रवाई के दौरान 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोग आयोजन में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। इनमें कपिल कुमार, श्याम प्रसाद, अरुण जैन, रामपाल, अमित सिंह, मोहित कुमार, देवेंद्र बघेल और उजाला सिंह जैसे नाम शामिल हैं।
हालांकि, पुलिस यह भी साफ कर चुकी है कि मुख्य आरोपी और संगठन की अध्यक्ष पिंकी चौधरी अभी तक गिरफ्त में नहीं आई हैं। उनकी तलाश जारी है और पुलिस टीम संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
मामला उस वक्त और गरमा गया, जब जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने इस घटना पर वीडियो बयान जारी किया। उन्होंने तलवार वितरण को लेकर हिंदू रक्षा दल का समर्थन करते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनके बयान के बाद यह मामला केवल पुलिस केस नहीं रह गया, बल्कि सामाजिक बहस का विषय बन गया।
अपने बयान में यति नरसिंहानंद गिरी ने कहा कि बांग्लादेश और कुछ अन्य देशों में हिंदुओं के साथ हुई घटनाओं की खबरों से भारत में भी लोगों के मन में डर बैठा है। सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें देखकर लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उनके अनुसार, इसी डर के चलते कुछ लोगों ने आत्मरक्षा के उद्देश्य से तलवारें बांटी होंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को केवल कानूनी नजरिये से नहीं, बल्कि समाज की सुरक्षा के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई और आशंका व्यक्त की कि उनके खिलाफ साजिश हो सकती है।
यति नरसिंहानंद के इस बयान के बाद मामला और संवेदनशील हो गया। कुछ लोग उनके बयान को भड़काऊ बता रहे हैं, जबकि समर्थक इसे हिंदू समाज की चिंता से जोड़कर देख रहे हैं। इसी वजह से यह प्रकरण अब Dasna controversy और Ghaziabad news की प्रमुख चर्चाओं में शामिल हो गया है।
गिरफ्तार आरोपियों से पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में यह सामने आया है कि वे हिंदू रक्षा दल से जुड़े हुए हैं और संगठन के निर्देश पर ही कार्यक्रम में शामिल हुए थे। आरोपियों का कहना है कि उन्हें बताया गया था कि यह आत्मरक्षा और जागरूकता से जुड़ा आयोजन है। इससे पहले पिंकी चौधरी भी सार्वजनिक रूप से यही तर्क दे चुकी हैं।
हालांकि, पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर हथियारों का वितरण किसी भी हाल में कानून के दायरे में नहीं आता। अधिकारियों के मुताबिक, चाहे उद्देश्य कुछ भी बताया जाए, लेकिन इस तरह के आयोजनों से आम जनता में डर का माहौल बनता है और शांति व्यवस्था बिगड़ने का खतरा रहता है।
इस पूरे मामले में सोशल मीडिया की भूमिका भी अहम रही है। तलवार वितरण के वीडियो वायरल होने के बाद ही प्रशासन तक इस आयोजन की गंभीरता पहुंची। हालांकि, पुलिस यह भी मानती है कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली अधूरी या भ्रामक जानकारी हालात को और बिगाड़ सकती है।
फिलहाल पुलिस यह जांच कर रही है कि तलवारें कहां से लाई गईं, कितनी तलवारें बांटी गईं और इस कार्यक्रम के पीछे असली मंशा क्या थी। प्रशासन का कहना है कि किसी भी संगठन को ऐसा कदम उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जिससे आम लोगों में डर पैदा हो।
कुल मिलाकर, Ghaziabad sword distribution case अब एक गंभीर और संवेदनशील मुद्दा बन चुका है। जांच के नतीजों के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होती है। फिलहाल पुलिस कार्रवाई जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।