मुख्य बिंदु:
• भारत ने कतर, सऊदी और कुवैत के साथ अब अमेरिका से भी LPG खरीद शुरू की
• सरकार ने कहा देश में गैस की कोई कमी नहीं, सप्लाई पूरी तरह सामान्य
• ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों को भारत ने बताया खतरनाक और अस्वीकार्य

PKN live l पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर लगातार हो रहे हमलों के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब देश केवल मिडिल ईस्ट पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिका से भी एलपीजी की खरीद की जा रही है, ताकि सप्लाई चेन में किसी तरह की रुकावट का असर भारत पर न पड़े।
यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। गैस भंडारण केंद्रों और एलएनजी टर्मिनलों पर हमलों की खबरों ने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है, खासकर उन देशों की जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने 19 मार्च 2026 को इस स्थिति पर जानकारी देते हुए कहा कि हालात जरूर चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन भारत में एलपीजी की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के किसी भी एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर के पास गैस खत्म होने की कोई रिपोर्ट नहीं आई है।
सरकार के मुताबिक, समय रहते वैकल्पिक सप्लाई की व्यवस्था कर ली गई थी। इसी रणनीति के तहत अब अमेरिका से भी एलपीजी की खरीद शुरू की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी प्रकार की आपूर्ति बाधित होने पर भी भारत में घरेलू गैस की उपलब्धता बनी रहे।
सप्लाई की स्थिति को लेकर सरकार ने विस्तृत आंकड़े भी साझा किए हैं। बताया गया कि देश में एलपीजी की ऑनलाइन बुकिंग बढ़कर 94 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं करीब 83 प्रतिशत सिलेंडर डिलीवरी डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड के माध्यम से की जा रही है, जिससे पारदर्शिता और उपभोक्ता सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हो रही हैं।
सरकार ने यह भी बताया कि लोगों में घबराहट के कारण होने वाली अतिरिक्त बुकिंग अब कम हो गई है। हाल ही में एक दिन में करीब 57 लाख रिफिल बुकिंग दर्ज की गई, जो सामान्य स्तर के अनुरूप है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि बाजार में फिलहाल कोई अफरा-तफरी की स्थिति नहीं है।
सुजाता शर्मा ने भरोसा दिलाया कि देशभर में एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई और डिलीवरी पूरी तरह सामान्य रूप से जारी है। सरकार लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर तत्काल कदम उठाने के लिए तैयार है।
इस बीच, पश्चिम एशिया में ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों को लेकर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। भारत ने इन हमलों को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है और कहा है कि इस तरह की घटनाएं वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बयान जारी करते हुए कहा कि भारत पहले भी इस क्षेत्र में नागरिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने से बचने की अपील कर चुका है। उन्होंने कहा कि हालिया हमले बेहद चिंताजनक हैं और पहले से अस्थिर वैश्विक ऊर्जा बाजार को और अधिक अस्थिर बना सकते हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई वैश्विक नेताओं से बातचीत की है। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय, ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से संपर्क कर पश्चिम एशिया की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की।
जानकारी के अनुसार, ईरान ने अपने साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हुए हमलों के जवाब में कतर के रास लाफान स्थित एलएनजी केंद्र सहित कई ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है। इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।
भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, यह स्थिति काफी संवेदनशील मानी जा रही है। ऐसे में अमेरिका से एलपीजी खरीदने का फैसला एक रणनीतिक और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की ऊर्जा नीति में बदलाव का संकेत भी है। इससे न केवल सप्लाई स्रोतों में विविधता आएगी, बल्कि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता भी कम होगी। भविष्य में यह रणनीति भारत को वैश्विक संकटों के दौरान अधिक स्थिर बनाए रखने में मदद कर सकती है।
सरकार ने आम जनता से भी अपील की है कि वे घबराकर अतिरिक्त गैस बुकिंग न करें और सामान्य तरीके से ही एलपीजी का उपयोग करें। अनावश्यक बुकिंग से सप्लाई सिस्टम पर दबाव बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर भले ही पूरी दुनिया पर पड़ रहा हो, लेकिन भारत ने समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था कर अपने नागरिकों के लिए गैस सप्लाई को सुरक्षित रखने की दिशा में मजबूत कदम उठाया है। आने वाले दिनों में स्थिति कैसी रहती है, इस पर नजर बनी रहेगी, लेकिन फिलहाल सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।