Sunday, January 18, 2026

Indore Contaminated Water Deaths: भागीरथपुरा में दूषित पानी से 14वीं मौत, 162 भर्ती

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PKN Live | Indore Contaminated Water Deaths: देश के सबसे स्वच्छ शहर के तमगे से पहचाने जाने वाले इंदौर में दूषित पेयजल ने भयावह रूप ले लिया है। भागीरथपुरा इलाके में गंदा पानी पीने से अब तक 14 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 162 से अधिक लोग विभिन्न अस्पतालों में इलाजरत हैं। यह घटना न सिर्फ नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि Indore contaminated water deaths जैसे गंभीर मुद्दे पर त्वरित और जवाबदेह कार्रवाई की मांग भी करती है।

14वें मृतक की पहचान और घटनाक्रम

14वें मृतक की पहचान अरविंद (43) पिता हीरालाल के रूप में हुई है, जो कुलकर्णी भट्टा का निवासी था। रविवार को वह भागीरथपुरा में काम के सिलसिले में पहुंचा था। वहीं उसकी तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद वह घर लौट आया और घरेलू दवाइयां लेता रहा। हालत में सुधार न होने पर परिजन उसे एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। अरविंद अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसके परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं, जो अलग रहते हैं। इस मौत ने स्थानीय लोगों के बीच दहशत और आक्रोश दोनों को बढ़ा दिया है।

मृतकों की सूची: बढ़ता आंकड़ा, बढ़ती चिंता

भागीरथपुरा और आसपास के क्षेत्रों में दूषित पानी से जान गंवाने वालों की सूची लंबी होती जा रही है। मृतकों में उर्मिला यादव (60), नंदलाल पाल (75), उमा कोरी (31), मंजुला (74), ताराबाई कोरी (70), गोमती रावत (50), सीमा प्रजापत (50), संतोष बिगोलिया, जीवन लाल बरेडे (80), अव्यान साहू (5 माह), अशोक लाल पंवार, सुमित्रा बाई, शंकर भाया (70) और अरविंद लिखर शामिल हैं। इनमें बुजुर्गों के साथ एक नवजात की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था और जल आपूर्ति की निगरानी पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।

अस्पतालों में हालात: 162 मरीज भर्ती

दूषित पानी से प्रभावित 162 मरीज फिलहाल सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती हैं। मरीजों में उल्टी-दस्त, तेज बुखार, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर इलाज मिलने से कई मरीजों की हालत स्थिर है, लेकिन संक्रमण का जोखिम अभी टला नहीं है। Indore water contamination crisis के चलते अस्पतालों में अतिरिक्त बेड और स्टाफ की व्यवस्था की गई है।

मुख्यमंत्री की समीक्षा और सख्त संदेश

बुधवार शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इंदौर पहुंचे। उन्होंने अलग-अलग अस्पतालों में जाकर मरीजों और उनके परिजनों से मुलाकात की और हालात का जायजा लिया। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए कि ऐसी कष्टदायक स्थिति दोबारा न बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह बयान Indore municipal water negligence जैसे आरोपों के बीच आया है।

मंत्री विजयवर्गीय का बयान और विवाद

Indore Contaminated Water Deaths: भागीरथपुरा में दूषित पानी से 14वीं मौत, 162 भर्ती - pknlive.comबुधवार को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के मीडियाकर्मी को अपशब्द कहते वीडियो सामने आया है।

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने X पर यह ट्वीट किया।

बैठक के बाद जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अस्पताल से बाहर आए तो मीडिया ने इलाज के खर्च और परिजनों को रिफंड न मिलने को लेकर सवाल पूछे। इस पर मंत्री का जवाब तीखा और आपत्तिजनक रहा। उन्होंने सवाल को “फोकट” बताते हुए झल्लाहट में अपशब्द कह दिए। रिपोर्टर के विरोध करने पर विवाद और बढ़ गया। हालांकि, कुछ देर बाद मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर अपने शब्दों पर खेद जताया। उन्होंने लिखा कि पिछले दो दिनों से वे और उनकी टीम बिना सोए प्रभावित क्षेत्र में काम कर रहे हैं और गहरे दुःख की अवस्था में उनके शब्द गलत निकल गए।

कांग्रेस का हमला: इस्तीफे की मांग

इस पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने सरकार और मंत्री पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को टैग करते हुए लिखा कि न तो पीड़ितों को मुफ्त इलाज मिल रहा है, न संवेदना, और ऊपर से मंत्री अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने नैतिकता के आधार पर मंत्री से तत्काल इस्तीफा लेने की मांग की। यह बयान Indore political controversy water crisis को और हवा देता दिखा।

हाईकोर्ट का सख्त रुख, स्टेटस रिपोर्ट तलब

भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों के मामले में हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में दो जनहित याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें एक इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इंसानी और दूसरी स्थानीय निवासी राहुल गायकवाड़ की ओर से है। संयुक्त सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि क्षेत्र के हालात बिगड़ते जा रहे हैं और मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है। शासन की ओर से दलील दी गई कि इंदौर के 10 अस्पतालों में सभी मरीजों का मुफ्त इलाज हो रहा है। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह तो करना ही पड़ेगा और 2 जनवरी तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। Indore High Court water case अब निगरानी में है।

जिम्मेदार कौन: अधिकारियों पर गंभीर आरोप

मामले में नगर निगम और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। निगमायुक्त दिलीप यादव पर गंदे पानी की शिकायतों की अनदेखी का आरोप है। अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया पर टेंडर प्रक्रिया रोकने और शिकायतें नजरअंदाज करने के आरोप लगे हैं। पार्षद कमल वाघेला पर क्षेत्र की परेशानी का समय पर समाधान न करने का आरोप है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर भी लगातार शिकायतों के बावजूद कदम न उठाने की बात कही जा रही है। जलकार्य प्रभारी बबलू शर्मा, प्रभारी संजीव श्रीवास्तव, उपयंत्री शुभम श्रीवास्तव और सहायक यंत्री योगेश जोशी पर भी जिम्मेदारी न निभाने के आरोप लगे हैं। Indore municipal accountability अब चर्चा के केंद्र में है।

कांग्रेस की 5 सदस्यीय जांच समिति

कांग्रेस ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। इसमें पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा, जयवर्धन सिंह, बदनावर विधायक भंवर सिंह शेखावत, तराना विधायक महेश परमार और सरदारपुर विधायक प्रताप ग्रेवाल शामिल हैं। समिति प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रिपोर्ट तैयार करेगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेगी।

भोपाल में भी अलर्ट, पानी की जांच शुरू

इंदौर की घटना के बाद भोपाल नगर निगम भी अलर्ट मोड में आ गया है। महापौर मालती राय के निर्देश पर सब इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और सुपरवाइजरों को निरीक्षण के आदेश दिए गए हैं। पीने के पानी की पाइपलाइनों की जांच के लिए टीम अवधपुरी पहुंची और कई घरों से पानी के सैंपल लिए गए। Bhopal water safety check के जरिए किसी भी संभावित संकट को टालने की कोशिश की जा रही है।

स्वच्छता के दावे पर सवाल

भागीरथपुरा की यह त्रासदी इंदौर के स्वच्छता मॉडल पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। Indore contaminated water deaths ने दिखा दिया है कि स्वच्छता केवल कचरा प्रबंधन तक सीमित नहीं, बल्कि सुरक्षित पेयजल भी उतना ही जरूरी है। अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई, हाईकोर्ट की रिपोर्ट और पीड़ितों को मिलने वाले न्याय पर टिकी हैं। जब तक दोषियों पर ठोस कदम नहीं उठते और जल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं होता, तब तक यह संकट पूरी तरह खत्म नहीं माना जा सकता।

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