Sunday, January 18, 2026

Indore Contaminated Water Deaths: इंदौर में दूषित पानी से 17वीं मौत, भागीरथपुरा में 9,416 लोगों की जांच | High Court Report

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PKN Live | Indore Contaminated Water Deaths: मध्यप्रदेश के इंदौर में दूषित पानी (Indore contaminated water) से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। भागीरथपुरा क्षेत्र में रविवार को 17वीं मौत की पुष्टि हुई, जिससे पूरे शहर में दहशत और प्रशासनिक चिंता और बढ़ गई है। इससे पहले रविवार तक मृतकों की संख्या 16 थी, लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर 17 हो गया है।

मृतक की पहचान रिटायर्ड पुलिसकर्मी ओमप्रकाश शर्मा (69) के रूप में हुई है। वे मूल रूप से धार जिले की शिव विहार कॉलोनी के निवासी थे और अपने बेटे से मिलने इंदौर आए थे। परिजनों के अनुसार, वे केवल ब्लड प्रेशर के मरीज थे और इससे पहले किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित नहीं थे।

Indore Contaminated Water Deaths: अचानक बिगड़ी तबीयत, किडनी फेल होने से मौत

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परिजनों ने बताया कि 1 जनवरी को ओमप्रकाश शर्मा को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई, जिसके बाद उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। शुरुआती जांच में सामने आया कि उनकी किडनी सही तरीके से काम नहीं कर रही थी। डॉक्टरों का कहना था कि दूषित पानी पीने के कारण शरीर में संक्रमण फैला, जिससे किडनी पर गंभीर असर पड़ा।

हालत बिगड़ने पर 2 जनवरी को उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया और दो दिन बाद वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। तमाम कोशिशों के बावजूद रविवार दोपहर करीब 1 बजे उनकी मौत हो गई। यह मामला इंदौर water contamination crisis की गंभीरता को साफ तौर पर उजागर करता है।

अस्पतालों में इलाज जारी, 142 मरीज अब भी भर्ती

शहर के बॉम्बे हॉस्पिटल समेत अन्य अस्पतालों में अभी भी कई मरीजों का इलाज चल रहा है। बॉम्बे हॉस्पिटल में रविवार रात तक 11 मरीज आईसीयू में भर्ती थे, जिनमें से 4 की हालत में सुधार होने पर उन्हें सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। फिलहाल 7 मरीज आईसीयू में गंभीर स्थिति में इलाजरत हैं।

अब तक कुल 398 मरीजों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती किया गया, जिनमें से 256 मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं। वर्तमान में शहर के अलग-अलग अस्पतालों में 142 मरीजों का इलाज जारी है। डॉक्टरों का कहना है कि अधिकांश मरीजों में डिहाइड्रेशन, गंभीर डायरिया और किडनी से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं।

भागीरथपुरा में स्वास्थ्य विभाग का बड़ा सर्वे

दूषित पानी से प्रभावित भागीरथपुरा क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग ने 4 जनवरी को बड़े स्तर पर घर-घर सर्वे अभियान चलाया। इस दौरान 2,354 घरों का सर्वे किया गया और कुल 9,416 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। जांच के दौरान 20 नए मरीज सामने आए, जबकि 429 पुराने मरीजों का फॉलोअप लिया गया।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव हसनी ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में एहतियात के तौर पर 5 एम्बुलेंस लगातार तैनात की गई हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सके। Indore health emergency को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है।

घर-घर ORS, जिंक और साफ पानी की किट

प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्र के प्रत्येक घर में 10 ओआरएस पैकेट और 30 जिंक की गोलियां वितरित की गई हैं। इसके साथ ही पानी को शुद्ध करने के लिए क्लीन वाटर बॉटल किट भी दी जा रही है, ताकि लोग घर पर ही पानी को सुरक्षित बना सकें।

लोगों को जागरूक करने के लिए 17 टीमें लगातार क्षेत्र में काम कर रही हैं। इन टीमों में जन अभियान परिषद के सदस्य, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर, आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम, सुपरवाइजर और विभिन्न एनजीओ के सदस्य शामिल हैं। टीमों का फोकस लोगों को दूषित पानी से होने वाली बीमारियों और बचाव के उपायों के बारे में जानकारी देना है।

हाईकोर्ट में पेश होगी विस्तृत रिपोर्ट

इस पूरे मामले को लेकर शासन की जवाबदेही भी सवालों के घेरे में है। मामले में मंगलवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट इंदौर बेंच में शासन द्वारा विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाएगी। रिपोर्ट में दूषित पानी की वजह, अब तक की गई कार्रवाई और आगे की रणनीति का ब्योरा शामिल होगा।

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है कि वह इस संकट का स्थायी समाधान निकाले और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।

कोलकाता, दिल्ली और भोपाल से आई विशेषज्ञ टीमें

रविवार को इंदौर स्मार्ट सिटी कार्यालय में कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में एक अहम बैठक हुई। बैठक में भागीरथपुरा क्षेत्र में चल रहे राहत और मरम्मत कार्यों की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने बताया कि कोलकाता, दिल्ली और भोपाल से आए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमें मौके पर काम कर रही हैं।

कोलकाता से आए वैज्ञानिक डॉ. प्रमित घोष और डॉ. गौतम चौधरी क्षेत्र से पानी के रैंडम सैंपल एकत्र कर वैज्ञानिक तरीके से जांच करेंगे। इन सैंपल्स की रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि पानी में कौन-कौन से बैक्टीरिया या हानिकारक तत्व मौजूद हैं, जो Indore water contamination की असली वजह बने।

पाइपलाइन मरम्मत और टैंकर से जल आपूर्ति

भागीरथपुरा इलाके में पाइपलाइन की मरम्मत का काम तेज़ी से चल रहा है। बोरिंग और पुरानी जल लाइनों में लीकेज की भी जांच की जा रही है। स्थानीय निवासी ललित ने बताया कि फिलहाल पीने के पानी की आपूर्ति टैंकरों के माध्यम से की जा रही है।

साफ पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए अब गलियों में बिसलरी और अन्य पैक्ड ड्रिंकिंग वाटर से भरे वाहन भी घूमने लगे हैं। हालांकि, लोग अभी भी प्रशासनिक व्यवस्था से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

महापौर का बयान, मुख्यमंत्री के निर्देश

इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इस समय प्रशासन की प्राथमिकता सिर्फ एक है—प्रभावित लोगों को हर संभव मदद पहुंचाना। उन्होंने बताया कि पूरा प्रशासन लगातार प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद है और जैसे ही किसी मरीज की सूचना मिलती है, उसे तुरंत इलाज और अस्पताल में भर्ती कराने की व्यवस्था की जा रही है।

महापौर के अनुसार, डॉ. मोहन यादव ने सभी जल लाइनों का सर्वे कराने और जहां से भी शिकायतें मिलें, उन्हें 48 घंटे के भीतर दुरुस्त करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। प्रशासन इन्हीं निर्देशों के तहत काम कर रहा है।

जनता में डर, जवाबदेही पर सवाल

लगातार हो रही मौतों के कारण भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों में लोगों के मन में डर बना हुआ है। लोग सवाल कर रहे हैं कि यदि समय रहते पाइपलाइन लीकेज और पानी की गुणवत्ता की जांच होती, तो इतनी बड़ी जनहानि क्यों होती।

Indore contaminated water deaths अब सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में हाईकोर्ट की सुनवाई और वैज्ञानिक रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार कौन है और पीड़ित परिवारों को न्याय कब मिलेगा।

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