Sunday, January 18, 2026

Whistleblower IPS Amitabh Thakur को 20 साल पुराने भूमि विवाद में गिरफ्तार

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PKN Live | उत्तर प्रदेश में पिछले कई वर्षों से लगातार भ्रष्टाचार, पुलिस सुधार और सरकारी अनियमितताओं पर आवाज उठाने वाले ips amitabh thakur को देर रात दिल्ली जा रही ट्रेन से गिरफ्तार किया गया। रिटायर्ड IPS अधिकारी, जिन्हें राज्य में “व्हिसलब्लोअर” के रूप में जाना जाता है, को शाहजहांपुर में उस समय पकड़ा गया जब वे लखनऊ-दिल्ली ट्रेन से सफर कर रहे थे। गिरफ्तारी का आधार 20 साल पुराना एक जमीन विवाद बताया गया है, जिस पर उनकी पत्नी ने गंभीर आरोप लगाए हैं और इसे “सरकार की ओर से की गई बदले की कार्रवाई” कहा है।

देर रात ट्रेन से गिरफ्तारी, 20 साल पुराने केस से जुड़ा मामला

सूत्रों के अनुसार ips amitabh thakur को बुधवार तड़के करीब 1.20 बजे गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि उन्होंने और उनकी पत्नी नूतन ठाकुर ने दो दशक पहले देवरिया ज़िले में एक प्लॉट अवैध रूप से हासिल कर उसे बेच दिया। शिकायतकर्ता संजय शर्मा ने 12 सितंबर को आरोप लगाया कि जमीन को प्राप्त करने के लिए फर्जी नाम, पते, शपथपत्र, आवेदन पत्र, ट्रेजरी चालान और ट्रांसफर डीड का उपयोग किया गया।

लखनऊ वेस्ट के डीसीपी विश्वजीत श्रीवास्तव के अनुसार शिकायत मिलने के बाद IPC की कई धाराओं में FIR दर्ज की गई और एक विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया। SIT की जांच में आरोप सही पाए गए और इसी आधार पर गिरफ्तारी की गई।

डीसीपी ने बताया, “आरोप था कि देवरिया में SP के रूप में तैनाती के दौरान ips amitabh thakur और उनकी पत्नी ने अवैध तरीके से जमीन हासिल कर आर्थिक लाभ के लिए बेची। SIT ने इसे सही पाया और उन्हें गिरफ्तार कर देवरिया ले जाया गया, जहां कोर्ट में पेशी की जाएगी।”

पत्नी नूतन ठाकुर ने कार्रवाई को बताया प्रतिशोध

अमिताभ ठाकुर की पत्नी और RTI एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर ने गिरफ्तारी को सरकार समर्थित प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताया। उनका कहना है कि यह केस पूरी तरह राजनीतिक बदले की कार्रवाई है, क्योंकि उनका परिवार लगातार राज्य सरकारों द्वारा संरक्षण प्राप्त अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता रहा है।

नूतन ने कहा, “यह घटना उस समय की है जब वे देवरिया में तैनात थे, यानी 20 साल पहले। पुलिस ने बदले की नीयत से यह केस तैयार किया है। वे हर मुद्दे पर बोलते हैं, जहां सरकार से जुड़े लोग शामिल होते हैं। उन्हें पहले भी सिस्टम को साफ करने के प्रयासों के कारण गिरफ्तार किया गया था।”

लंबे समय से सरकार और व्यवस्था पर उठाते रहे हैं सवाल

ips amitabh thakur का करियर विवादों से घिरा रहा है, लेकिन उन पर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का ठप्पा हमेशा गहरा रहा। कुछ महीने पहले उन्होंने कानपुर के एक वकील और एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी पर कथित रूप से अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया था और उनके विरुद्ध जांच की मांग की थी।

बिहार मूल के 57 वर्षीय ठाकुर IIT कानपुर से इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं। उन्होंने 1992 में यूपी कैडर में IPS सेवा जॉइन की और 1994 में गोरखपुर में एडिशनल SP के रूप में पहली नियुक्ति मिली। अपने करियर में उन्हें 24 बार स्थानांतरण का सामना करना पड़ा।

2021 में आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में गिरफ्तार होने के बाद सरकार ने उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी थी। छह महीने जेल में रहने के बाद उन्हें जमानत मिली।

किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं, इसलिए बने दोनों सरकारों के निशाने पर

दिलचस्प बात यह है कि ips amitabh thakur किसी राजनीतिक दल के करीब नहीं माने जाते। अखिलेश यादव सरकार के दौरान भी उन्हें उनके “तेजस्वी और पारदर्शिता की मांग वाले रुख” के कारण अलग-थलग करने की कोशिश की गई। 2013 में उन पर अंकुश लगाने के लिए “SP, Rules & Manual” नाम का पोस्ट तक बना दिया गया था ताकि उन्हें सक्रिय पुलिस कामकाज से दूर रखा जा सके।

उन्होंने उच्च न्यायालय के लखनऊ खंडपीठ में कई सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार से जुड़े मामले दाखिल किए थे। हालांकि अभी तक कोई मामला अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंचा है।

पहले भी उठाई थी भारी कीमत

2021 में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तारी ने उनके करियर को एक बड़ा धक्का दिया। उस मामले में भी उनके समर्थकों ने कहा था कि वे सत्ता प्रतिष्ठान के लिए असुविधाजनक बन चुके थे।

नूतन ठाकुर का कहना है, “जो लोग शक्तिशाली लोगों को उजागर करते हैं, उन्हें ऐसे ही हालात का सामना करना पड़ता है। हम इसके लिए तैयार हैं।”

क्या है जमीन विवाद का मूल मामला

शिकायत के अनुसार देवरिया में स्थित जिस प्लॉट की बात की जा रही है, वह सरकारी दस्तावेज़ों में गलत जानकारी और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किसी अन्य व्यक्ति के नाम अलॉट कराया गया था। आरोप है कि उस प्लॉट को बाद में ठाकुर दंपति ने बेच दिया। SIT ने दस्तावेजों की जांच कर आरोपों को सही माना, लेकिन ठाकुर परिवार का कहना है कि यह पूरी तरह fabricated case है।

आगे की कार्रवाई और कानूनी लड़ाई

ips amitabh thakur को अब देवरिया कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस रिमांड और अन्य प्रक्रियाओं पर निर्णय होगा। उनकी पत्नी नूतन ने संकेत दिया है कि वे इस कार्रवाई को कानूनी रूप से चुनौती देंगी और इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” साबित करने के प्रबल प्रयास करेंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि यह मामला दो दशक पुराना है और इसमें प्रशासनिक तथा दस्तावेजी प्रक्रिया से जुड़े कई पहलू हैं, इसलिए इसमें लंबी कानूनी लड़ाई की संभावना है।

एक सवाल फिर उभरता है: क्या सिस्टम व्हिसलब्लोअर्स को कुचल देता है?

अमिताभ ठाकुर का मामला केवल एक जमीन विवाद नहीं है। यह इस व्यापक बहस को फिर से जीवित करता है कि भारतीय व्यवस्था में सिस्टम के भीतर से उठने वाली आवाज़ें अक्सर कैसे दबा दी जाती हैं। चाहे corruption cases, police reforms, public welfare issues या सरकारी अधिकारियों पर सवाल खड़े करना हो, ठाकुर ने हमेशा अपनी आवाज उठाई, जिसकी कीमत उन्हें बार-बार चुकानी पड़ी है।

उनकी गिरफ्तारी एक बार फिर यह प्रश्न उठाती है कि क्या भारत में व्हिसलब्लोअर सुरक्षित हैं, खासकर जब वे सत्ता प्रतिष्ठान को चुनौती देते हैं।

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