Sunday, January 18, 2026

JNU में नारेबाजी का वीडियो वायरल, मोदी-शाह के खिलाफ लगे नारे

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PKN Live | दिल्ली की प्रतिष्ठित Jawaharlal Nehru University (JNU) एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गई है। मंगलवार को सामने आए एक वीडियो में कुछ छात्र प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं। करीब 35 सेकंड के इस वीडियो में छात्र यह कहते सुने जा सकते हैं कि “मोदी-शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर।”

यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है और इसके बाद देशभर में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह नारेबाजी 2020 दिल्ली दंगों के आरोपी Umar Khalid और Sharjeel Imam की जमानत याचिका खारिज होने के विरोध में की गई थी।

Delhi JNU Protest Slogan Viral Video; Narendra Modi Amit Shah | Umar Khalid  - Delhi Riots | JNU में मोदी-शाह के खिलाफ नारेबाजी: दिल्ली दंगों के आरोपी  के समर्थन में जुलूस निकाला;

उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में प्रदर्शन

सूत्रों के अनुसार, JNU कैंपस में कुछ छात्रों ने उमर खालिद के समर्थन में जुलूस भी निकाला। उनका कहना था कि दिल्ली दंगा केस में दोनों आरोपियों के साथ न्याय नहीं हुआ है। छात्रों का दावा है कि यह विरोध प्रदर्शन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत किया गया एक वैचारिक विरोध था।

यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब एक दिन पहले ही Supreme Court of India ने दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोनों आरोपी अब एक साल तक इस केस में नई जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकते।

JNU छात्रसंघ का पक्ष क्या है?

JNU स्टूडेंट्स यूनियन की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने इस पूरे मामले पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि हर साल 5 जनवरी को 2020 में JNU कैंपस में हुई हिंसा की बरसी पर छात्र विरोध प्रदर्शन करते हैं। उनका दावा है कि इस दौरान लगाए गए नारे वैचारिक थे और किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाकर नहीं लगाए गए।

मिश्रा ने समाचार एजेंसी Press Trust of India (PTI) से बातचीत में कहा कि “ये नारे किसी व्यक्तिगत हमले के लिए नहीं थे और न ही किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने की मंशा से लगाए गए थे। यह केवल एक विचारधारात्मक विरोध था।”

दिल्ली पुलिस का बयान

इस पूरे मामले पर Delhi Police की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फिलहाल इस नारेबाजी को लेकर कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। पुलिस सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की निगरानी कर रही है, लेकिन अभी तक किसी तरह की कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया, उदित राज का बयान

JNU कैंपस में हुई नारेबाजी पर Indian National Congress की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। कांग्रेस नेता Udit Raj ने कहा कि यह छात्रों का गुस्सा जाहिर करने का तरीका है। उन्होंने आरोप लगाया कि उमर खालिद और शरजील इमाम के साथ इसलिए सख्ती की जा रही है क्योंकि वे मुसलमान हैं।

उदित राज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है और JNU में 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े “बड़ी साजिश” मामले में आए फैसले के खिलाफ छात्रों में नाराजगी है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराना नागरिकों का अधिकार है।

5 जनवरी 2020 को JNU कैंपस में क्या हुआ था?

5 जनवरी 2020 को JNU कैंपस में हुई हिंसा देशभर में सुर्खियों में रही थी। उस दिन कुछ नकाबपोश लोग कैंपस में घुस आए थे और उन्होंने तीन हॉस्टलों में छात्रों पर हमला किया था। हमलावरों ने लाठियों, पत्थरों और लोहे की छड़ों से छात्रों को निशाना बनाया।

करीब दो घंटे तक कैंपस में अराजकता का माहौल बना रहा। इस हिंसा में JNU स्टूडेंट्स यूनियन की तत्कालीन अध्यक्ष आइशी घोष समेत कम से कम 28 छात्र घायल हुए थे। हॉस्टलों की खिड़कियां, फर्नीचर और छात्रों का निजी सामान भी तोड़ दिया गया था।

दिल्ली पुलिस पर लगे थे गंभीर आरोप

2020 की JNU हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस पर भी सवाल उठे थे। छात्रों और विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने समय पर कार्रवाई नहीं की। इसके अलावा FIR में छात्र संघ नेताओं के नाम शामिल होने को लेकर भी पक्षपात के आरोप लगाए गए थे।

यह मामला लंबे समय तक राजनीतिक बहस का विषय बना रहा और JNU को एक बार फिर वैचारिक संघर्ष का केंद्र बताया जाने लगा।

दिल्ली दंगा केस और सुप्रीम कोर्ट का फैसला

दिल्ली में फरवरी 2020 में हुई हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी और 250 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस दौरान 750 से अधिक FIR दर्ज की गई थीं। इसी मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत आरोप लगाए गए।

शरजील इमाम 28 जनवरी 2020 से और उमर खालिद 13 सितंबर 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं। दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2025 को उनकी याचिका खारिज करते हुए साफ कहा कि एक साल तक वे इस मामले में नई जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकते।

उमर खालिद अब तक निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कुल छह बार जमानत के लिए याचिका दायर कर चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें निराशा हाथ लगी है।

सियासत और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर फिर बहस

JNU में नारेबाजी का यह ताजा मामला एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राष्ट्रविरोधी नारे और कैंपस राजनीति पर बहस को हवा दे रहा है। एक तरफ जहां सरकार समर्थक इसे देश के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ आपत्तिजनक और अस्वीकार्य बता रहे हैं, वहीं विपक्ष और छात्र संगठन इसे लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा करार दे रहे हैं।

फिलहाल, दिल्ली पुलिस की ओर से कोई शिकायत दर्ज न होने के कारण मामला कानूनी रूप से आगे नहीं बढ़ा है, लेकिन सोशल मीडिया पर यह वीडियो राजनीतिक बयानबाजी का बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि JNU प्रशासन या कानून-व्यवस्था एजेंसियां इस पर क्या कदम उठाती हैं।

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