PKN Live | मेरठ जिले में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान यानी Special Intensive Revision (SIR) के तहत जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में करीब 2.84 लाख मतदाताओं को चुनाव आयोग की ओर से नोटिस भेजे जाएंगे। यह नोटिस 6 जनवरी 2026 को Draft Voter List जारी होते ही भेजे जाने की तैयारी है।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, इन मतदाताओं ने गणना प्रपत्र तो भरकर जमा किए थे, लेकिन उनमें वर्ष 2003 की मतदाता सूची से संबंधित आवश्यक विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया था। इसी आधार पर अब इन मतदाताओं से दस्तावेजी प्रमाण मांगे जाएंगे। Voter List Revision 2026 के तहत यह प्रक्रिया बेहद अहम मानी जा रही है।
Special Intensive Revision के तहत क्यों भेजे जा रहे हैं नोटिस
चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे SIR Campaign का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध, अद्यतन और विवादमुक्त बनाना है। इसी क्रम में वर्ष 2003 की मतदाता सूची को आधार मानते हुए वर्तमान मतदाताओं का सत्यापन किया जा रहा है।
मेरठ जिले में कुल सात विधानसभा क्षेत्रों में 26.99 लाख मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें से केवल 20.19 लाख मतदाताओं ने ही गणना प्रपत्र भरकर वापस जमा किए। इन 20.19 लाख में से भी 17,45,723 मतदाताओं के दस्तावेज ऐसे पाए गए, जिनका सत्यापन वर्ष 2003 की मतदाता सूची से किया जा सका।
हालांकि 2,84,736 मतदाता ऐसे हैं, जिन्होंने गणना प्रपत्र तो दिया, लेकिन उसमें 2003 Voter List Reference शामिल नहीं किया। इन्हीं मतदाताओं को अब Election Commission Notice भेजा जाएगा।
6 जनवरी 2026 को जारी होगी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट
प्रशासन ने साफ किया है कि 6 जनवरी 2026 को Draft Electoral Roll प्रकाशित की जाएगी। इस सूची में उन सभी मतदाताओं के नाम शामिल होंगे, जिन्होंने गणना प्रपत्र जमा किया है, चाहे उन्होंने वर्ष 2003 की सूची का विवरण दिया हो या नहीं।
लेकिन जिन मतदाताओं ने 2003 की मतदाता सूची का विवरण नहीं दिया है, उन्हें ड्राफ्ट लिस्ट में नाम होने के बावजूद नोटिस जारी किया जाएगा। Draft Voter List 2026 जारी होने के बाद मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर भी मिलेगा।
यदि किसी व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत Claim and Objection दाखिल कर सकेगा।
नोटिस का जवाब देना होगा अनिवार्य
चुनाव आयोग द्वारा भेजे जाने वाले नोटिस के जवाब में संबंधित मतदाताओं को अपनी और अपने माता-पिता से जुड़े जन्म संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि नोटिस का जवाब न देने या संतोषजनक प्रमाण न देने की स्थिति में मतदाता सूची में नाम पर असर पड़ सकता है।
इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए विशेष अधिकारी भी तैनात किए जा रहे हैं, जो नोटिस के जवाबों की सुनवाई करेंगे और दस्तावेजों की जांच करेंगे।
जिलाधिकारी ने दी जानकारी
मेरठ के जिलाधिकारी Dr. V. K. Singh ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया Election Commission of India के निर्देशों के तहत की जा रही है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को पूरी तरह प्रामाणिक बनाना है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मतदाताओं को नोटिस मिलेगा, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। यदि वे निर्धारित समय पर सही दस्तावेज उपलब्ध करा देते हैं, तो उनका नाम मतदाता सूची में सुरक्षित रहेगा।
कौन भर सकता है Form-6 और कौन नहीं
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवा ही Form-6 भरकर नए मतदाता बन सकते हैं। लेकिन इसके साथ उन्हें घोषणापत्र देना होगा और अपने माता-पिता या दादा-दादी का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में दर्ज होने का प्रमाण भी देना होगा।
महत्वपूर्ण बात यह है कि SIR अभियान के तहत जिन लोगों ने गणना प्रपत्र जमा नहीं किया है या जिन्हें आयोग की ओर से नोटिस भेजा जाएगा, वे Form-6 के जरिए नया पंजीकरण नहीं कर सकेंगे।
जन्म तिथि और जन्म स्थान के आधार पर दस्तावेजों की श्रेणियां
Election Commission Guidelines के अनुसार, मतदाताओं से मांगे जाने वाले दस्तावेज जन्म की तारीख और जन्म स्थान के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में तय किए गए हैं।
1 जुलाई 1987 से पहले भारत में जन्मे व्यक्ति
ऐसे मतदाताओं को केवल अपनी जन्म तिथि और जन्म स्थान से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे।
1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे व्यक्ति
इन मतदाताओं को अपनी जन्म तिथि और जन्म स्थान के साथ-साथ अपने माता या पिता की जन्म तिथि और जन्म स्थान को प्रमाणित करने वाले दस्तावेज देने होंगे।
2 दिसंबर 2004 के बाद भारत में जन्मे व्यक्ति
इस श्रेणी में आने वाले मतदाताओं को अपनी, अपने माता और अपने पिता तीनों की जन्म तिथि और जन्म स्थान से जुड़े प्रमाण देने होंगे। यदि माता-पिता भारतीय नागरिक नहीं हैं, तो जन्म के समय उनके वैध पासपोर्ट और वीजा की प्रति भी अनिवार्य होगी।
यदि जन्म भारत के बाहर हुआ है, तो विदेश स्थित भारतीय मिशन द्वारा जारी Birth Registration Certificate प्रस्तुत करना होगा।
मान्य दस्तावेजों की सूची
जन्म तिथि और जन्म स्थान प्रमाणित करने के लिए आयोग ने कई प्रकार के दस्तावेजों को मान्य किया है।
इनमें केंद्र या राज्य सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के नियमित कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जारी पहचान पत्र और पेंशन भुगतान आदेश शामिल हैं।
इसके अलावा 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में सरकार, स्थानीय निकाय, बैंक, डाकघर, एलआईसी या सार्वजनिक उपक्रम द्वारा जारी कोई भी पहचान पत्र या अभिलेख मान्य होगा।
सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी Birth Certificate, Passport, मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय द्वारा जारी Matriculation या Educational Certificate भी स्वीकार किए जाएंगे।
स्थायी निवास प्रमाण पत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र, ओबीसी, एससी, एसटी या अन्य जाति प्रमाण पत्र, National Register of Citizens, परिवार रजिस्टर और सरकार द्वारा जारी भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र भी मान्य दस्तावेजों की सूची में शामिल हैं।
मतदाताओं के लिए क्यों अहम है यह प्रक्रिया
Voter Verification Process 2026 को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि यह अभियान भविष्य के चुनावों की निष्पक्षता और पारदर्शिता के लिए बेहद जरूरी है। फर्जी, दोहरे या अपूर्ण रिकॉर्ड वाले नामों को हटाने और वास्तविक मतदाताओं को सुरक्षित रखने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
हालांकि बड़ी संख्या में नोटिस जारी होने से मतदाताओं में भ्रम और चिंता की स्थिति भी बन रही है। प्रशासन का कहना है कि समय रहते सही जानकारी और दस्तावेज देने से किसी भी तरह की समस्या से बचा जा सकता है।
मेरठ में Special Intensive Revision 2026 के तहत 2.84 लाख मतदाताओं को भेजे जाने वाले नोटिस यह संकेत देते हैं कि चुनाव आयोग मतदाता सूची को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही के मूड में नहीं है। 6 जनवरी 2026 को Draft Voter List जारी होने के साथ ही यह प्रक्रिया निर्णायक चरण में प्रवेश करेगी।
मतदाताओं के लिए यह जरूरी है कि वे नोटिस मिलने पर समय पर जवाब दें और मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराएं। ऐसा न करने पर भविष्य में मताधिकार से जुड़ी परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। आने वाले दिनों में यह प्रक्रिया मेरठ ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक अहम उदाहरण बन सकती है।


