Sunday, January 18, 2026

लिखित सूचना दिए बिना की गई गिरफ्तारी अवैध, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

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PKN Live | मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि Grounds of Arrest in Writing यानी गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में बताए बिना की गई किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी अवैध मानी जाएगी। यह फैसला न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों को भी मजबूती प्रदान करता है।

यह आदेश 7 जनवरी 2026 को अनिल कुमार मिश्रा बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य मामले में पारित किया गया, जो रिट याचिका नंबर 2 of 2026 के रूप में दायर की गई थी। इस निर्णय को कानूनी विशेषज्ञ Landmark Judgment on Illegal Arrest in India के रूप में देख रहे हैं।

कौन सी बेंच ने सुनाया फैसला

यह फैसला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ द्वारा सुनाया गया। बेंच में न्यायमूर्ति जी.एस. आहलुवालिया और न्यायमूर्ति आशीष श्रोती शामिल थे।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि गिरफ्तारी केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार करती है, इसलिए इसे संविधान और कानून के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए।

मामला क्या था: Anil Kumar Mishra Case Explained

इस केस में हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट अनिल कुमार मिश्रा और अन्य अधिवक्ताओं को 1 जनवरी 2026 को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर का पोस्टर जलाया।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि

  • उन्हें FIR दर्ज होने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया

  • गिरफ्तारी के समय उन्हें Written Grounds of Arrest नहीं बताए गए

  • गिरफ्तारी का आधार न तो लिखित में दिया गया और न ही उनकी समझ की भाषा में समझाया गया

इसी आधार पर उन्होंने गिरफ्तारी को Illegal Arrest under Indian Constitution बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी।

याचिकाकर्ता की दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि पुलिस की पूरी कार्रवाई संविधान और नए आपराधिक कानूनों के खिलाफ है। वकीलों ने तर्क दिया कि

  • गिरफ्तारी से पहले या गिरफ्तारी के समय लिखित सूचना देना अनिवार्य है

  • बिना लिखित सूचना आरोपी प्रभावी रूप से अपनी कानूनी रक्षा नहीं कर सकता

  • यह सीधे तौर पर Article 22(1) of Constitution of India का उल्लंघन है

इसके साथ ही यह भी कहा गया कि BNSS Section 47 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023) में स्पष्ट प्रावधान है कि गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में बताए जाएं।

हाईकोर्ट की टिप्पणी: पुलिस प्रक्रिया पर सख्त रुख

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों को स्वीकार करते हुए साफ शब्दों में कहा कि
गिरफ्तारी के समय आरोपी को

  • उस पर लगे आरोप

  • गिरफ्तारी का आधार

  • उसकी समझ में आने वाली भाषा में
    लिखित रूप से बताना संवैधानिक अनिवार्यता है।

कोर्ट ने कहा कि लिखित सूचना इसलिए आवश्यक है ताकि आरोपी

  • रिमांड का प्रभावी विरोध कर सके

  • कानूनी सलाह ले सके

  • अपनी रक्षा की रणनीति तय कर सके

Article 22(1) और BNSS Section 47 की व्याख्या

कोर्ट ने अपने फैसले में Article 22(1) और BNSS Section 47 की विस्तार से व्याख्या की।
अदालत ने कहा कि

  • मौखिक जानकारी पर्याप्त नहीं है

  • गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में देना जरूरी है

  • यह केवल औपचारिकता नहीं बल्कि आरोपी का मौलिक अधिकार है

कोर्ट के अनुसार, लिखित सूचना के अभाव में की गई गिरफ्तारी Illegal under Indian Law मानी जाएगी, चाहे आरोप कितने भी गंभीर क्यों न हों।

गिरफ्तारी को क्यों बताया अवैध

इस मामले में पुलिस यह साबित नहीं कर सकी कि

  • गिरफ्तारी के समय लिखित Grounds of Arrest दिए गए थे

  • आरोपी को उसके अधिकारों की जानकारी दी गई थी

इसी आधार पर कोर्ट ने कहा कि यह गिरफ्तारी कानूनन टिकाऊ नहीं है और इसे Illegal Arrest घोषित किया जाता है।

1 लाख रुपये के निजी मुचलके पर रिहाई

हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी को अवैध ठहराते हुए याचिकाकर्ता को बड़ी राहत दी। अदालत ने आदेश दिया कि

  • याचिकाकर्ता को 1 लाख रुपये के निजी मुचलके पर रिहा किया जाए

  • यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा

यह राहत केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि एक Legal Precedent for Future Arrests मानी जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों का भी उल्लेख किया। विशेष रूप से

  • Arnesh Kumar vs State of Bihar

  • D.K. Basu vs State of West Bengal

इन मामलों में भी सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी के दौरान अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामला उन्हीं सिद्धांतों की पुनः पुष्टि करता है।

पुलिस और प्रशासन पर पड़ेगा असर

कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला Police Arrest Procedure in India को लेकर एक नया मानक तय करेगा।
अब पुलिस को

  • हर गिरफ्तारी में लिखित Grounds देना होगा

  • नियमों की अनदेखी पर गिरफ्तारी रद्द हो सकती है

  • अधिकारियों पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय हो सकती है

आम नागरिकों के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला

यह फैसला आम नागरिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि

  • यह मनमानी गिरफ्तारी पर रोक लगाता है

  • मौलिक अधिकारों को मजबूत करता है

  • पुलिस जवाबदेही सुनिश्चित करता है

विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय Right to Personal Liberty India को व्यवहारिक रूप में लागू करने की दिशा में बड़ा कदम है।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का यह फैसला सिर्फ एक केस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को प्रभावित करने वाला है। बिना लिखित सूचना गिरफ्तारी को अवैध घोषित करना कानून के शासन को मजबूती देता है।

अब यह साफ हो गया है कि

  • गिरफ्तारी कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं

  • बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारी है

  • और इसमें जरा सी भी लापरवाही गिरफ्तारी को अवैध बना सकती है

यह फैसला आने वाले समय में Illegal Arrest Cases in India के लिए एक मजबूत आधार बनेगा और नागरिक अधिकारों की रक्षा में मील का पत्थर साबित होगा।

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