PKN Live | प्रयागराज माघ मेला 2025-26 के दौरान एक बार फिर ज्योतिषपीठ शंकराचार्य पद को लेकर विवाद चर्चा के केंद्र में आ गया है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को औपचारिक नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं।
यह नोटिस उस समय जारी किया गया है जब Jyotishpeeth Shankaracharya dispute से जुड़ा मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। प्रशासन का कहना है कि न्यायालय में लंबित प्रकरण के बावजूद धार्मिक पद का सार्वजनिक उपयोग गंभीर सवाल खड़े करता है।
Prayagraj Mela Authority notice क्यों जारी किया गया
मेला प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि माघ मेला क्षेत्र में लगाए गए बोर्ड, पोस्टर और प्रचार सामग्री में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को “ज्योतिषपीठ शंकराचार्य” के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
प्राधिकरण का मानना है कि यह स्थिति Supreme Court Shankaracharya case से जुड़े आदेशों की भावना के विपरीत प्रतीत होती है। इसी आधार पर Prayagraj Mela Authority notice जारी कर जवाब तलब किया गया।
किसे भेजा गया नोटिस और कहां से जुड़ा मामला
यह नोटिस सेक्टर-4, माघ मेला क्षेत्र में संचालित शिविर को लेकर भेजा गया है। नोटिस सीधे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के नाम जारी किया गया है, जिनके शिविर में ज्योतिषपीठ शंकराचार्य शीर्षक का उपयोग किया जा रहा था।
प्रशासन ने साफ किया है कि यह कार्रवाई किसी धार्मिक विचारधारा के विरोध में नहीं, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी के तहत की गई है।
Jyotishpeeth Shankaracharya dispute की पृष्ठभूमि
ज्योतिषपीठ शंकराचार्य पद से जुड़ा विवाद वर्ष 2020 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस मामले में पहले ही शीर्ष अदालत यह स्पष्ट कर चुकी है कि अंतिम निर्णय आने तक—
- किसी नई नियुक्ति
- किसी पट्टाभिषेक
- या सार्वजनिक पद-घोषणा
की अनुमति नहीं होगी।
इसी निर्देश के आधार पर Prayagraj Magh Mela controversy सामने आई है।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लेख
नोटिस में इलाहाबाद हाईकोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का भी हवाला दिया गया है, जिसमें यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे।
प्राधिकरण का कहना है कि जब मामला न्यायालय में लंबित है, तब धार्मिक पद का सार्वजनिक प्रचार न केवल भ्रम की स्थिति पैदा करता है, बल्कि कानून व्यवस्था से जुड़ा विषय भी बन जाता है।
नोटिस में पूछे गए प्रमुख सवाल
Prayagraj Mela Authority notice में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है
- शंकराचार्य शीर्षक का प्रयोग किस वैधानिक आधार पर किया जा रहा है
- क्या यह न्यायालयीन आदेशों की अवहेलना की श्रेणी में नहीं आता
- शिविर में लगी प्रचार सामग्री क्या आपकी अनुमति से लगाई गई है
इन सभी बिंदुओं पर 24 घंटे के भीतर लिखित उत्तर अनिवार्य किया गया है।
प्रशासन का पक्ष क्या है
मेला प्राधिकरण ने अपने नोटिस में यह भी स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी संत, संस्था या धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं है।
प्रशासन के अनुसार, माघ मेला जैसे विशाल आयोजन में—
- कानूनी संतुलन
- न्यायिक आदेशों का पालन
- और प्रशासनिक निष्पक्षता
सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है।
जवाब नहीं मिलने पर क्या कार्रवाई हो सकती है
यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है, तो मेला प्राधिकरण आगे की कार्रवाई कर सकता है।
संभावित कदमों में—
- प्रचार सामग्री हटाने के निर्देश
- शिविर से संबंधित प्रशासनिक रोक
- या मामला उच्च अधिकारियों को भेजना
शामिल हो सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय जवाब मिलने के बाद ही लिया जाएगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला
यह विवाद केवल धार्मिक पद तक सीमित नहीं है। यह मामला सीधे तौर पर—
- धार्मिक परंपराओं
- न्यायिक प्रक्रिया
- और प्रशासनिक मर्यादा
के संतुलन से जुड़ा हुआ है।
Supreme Court Shankaracharya case के चलते देशभर की निगाहें इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई हैं।
प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा जारी किया गया यह नोटिस स्पष्ट संकेत देता है कि चाहे आयोजन धार्मिक हो या सामाजिक, कानून और न्यायिक आदेश सर्वोपरि रहेंगे।
जब तक Jyotishpeeth Shankaracharya dispute पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक किसी भी प्रकार की सार्वजनिक पद-घोषणा प्रशासनिक विवाद को जन्म दे सकती है।
यह मामला आने वाले दिनों में माघ मेला की सबसे अहम प्रशासनिक घटनाओं में शामिल माना जा रहा है।