PKN Live | गाजियाबाद की चर्चित रेल विहार सहकारी आवास समिति लिमिटेड एक बार फिर गंभीर आरोपों और सरकारी जांच के दायरे में आ गई है। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद और सहकारिता विभाग की ओर से सामने आए आधिकारिक पत्रों और जांच रिपोर्टों में यह आशंका जताई गई है कि समिति में वर्षों से नियमों की अनदेखी कर सार्वजनिक भूमि का दुरुपयोग किया गया है।
प्रशासन द्वारा कराई गई जांच में यह संकेत मिले हैं कि समिति की कुछ पूर्व प्रबंध समितियों ने न केवल अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया, बल्कि बिना किसी सक्षम अनुमति के समिति का स्वरूप ही बदल डाला। जांच के अनुसार, सार्वजनिक उपयोग के लिए चिह्नित भूमि को खुर्द-बुर्द कर वहां बहुमंजिला इमारतों का निर्माण किया गया, जो सहकारी अधिनियम और नगर नियोजन नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
कैसे शुरू हुई जांच
पूरे मामले की शुरुआत उस समय हुई जब उप जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), गाजियाबाद द्वारा 16 सितंबर 2025 को कार्यालय आदेश जारी कर उ.प्र. सहकारी समिति अधिनियम 1965 की धारा 66 के अंतर्गत रेल विहार सहकारी आवास समिति के अभिलेखों, बहियों और संपत्तियों के विस्तृत निरीक्षण के आदेश दिए गए।
इस जांच की जिम्मेदारी सहकारी अधिकारी (आवास), गाजियाबाद को सौंपी गई। अधिकारी द्वारा कई सप्ताह तक रिकॉर्ड की पड़ताल, स्थलीय निरीक्षण और उपलब्ध दस्तावेजों का विश्लेषण किया गया। इसके बाद 10 दिसंबर 2025 को विस्तृत आख्या (रिपोर्ट) तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजी गई।
जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया
जांच रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया है कि:
समिति की सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर अवैध कब्जा किया गया
बिना निबंधक एवं सक्षम प्राधिकरण की अनुमति के बहुमंजिला निर्माण कराया गया
समिति के मूल स्वरूप में अवैध परिवर्तन किया गया
नियमों के विरुद्ध जाकर भूखंडों और फ्लैटों का क्रय-विक्रय किया गया
पूर्व प्रबंध कमेटी की भूमिका संदिग्ध पाई गई
रिपोर्ट के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्य यह संकेत देते हैं कि समिति की भूमि की खुर्द-बुर्द के आरोप प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होते हैं।
भूखंड और फ्लैटों की बिक्री पर रोक की सिफारिश
इन गंभीर निष्कर्षों के बाद सहकारी अधिकारी (आवास), गाजियाबाद ने यह संस्तुति दी है कि समिति के सभी भूखंडों और फ्लैटों के क्रय-विक्रय पर तत्काल रोक लगाई जाए। इसका उद्देश्य यह बताया गया है कि आगे किसी प्रकार का अवैध लेन-देन न हो और आम समिति सदस्यों के हित सुरक्षित रह सकें।
इसके बाद अपर आवास आयुक्त/अपर निबंधक, लखनऊ द्वारा संबंधित उप निबंधक (निबंधन), गाजियाबाद को निर्देश देने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिससे रजिस्ट्री और बिक्री पर औपचारिक रोक लगाई जा सके।
अखबार की खबर और ‘इच्छा मृत्यु’ का मामला
इस प्रकरण ने तब और तूल पकड़ा जब गाजियाबाद के एक स्थानीय समाचार पत्र में यह खबर प्रकाशित हुई —
“करोड़ों की जमीन प्रधानमंत्री के नाम कर मांगी इच्छा मृत्यु”
खबर में दावा किया गया कि लोनी क्षेत्र में रहने वाले लगभग 350 रिटायर्ड कर्मचारियों की जमीन कथित रूप से भू-माफियाओं द्वारा हड़प ली गई है। रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय तक अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद समिति के 35 बुजुर्ग सदस्यों ने राष्ट्रपति भवन को पत्र भेजकर इच्छा मृत्यु की मांग की है।
लगातार मिल रही शिकायतें
अधिकारियों के अनुसार, रेल विहार सहकारी आवास समिति के खिलाफ श्री संदीप सहित कई सदस्यों द्वारा लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। इनमें मुख्य रूप से ये आरोप शामिल हैं:
सदस्यों की भूमि बिल्डरों को सौंप देना
पार्क, सड़क और सार्वजनिक स्थलों पर कब्जा
समिति की जमीन भू-माफियाओं को बेच देना
कर्मचारियों की नियुक्ति में अनियमितता
चारदीवारी, गेट और सुरक्षा व्यवस्था में वित्तीय गड़बड़ी
गार्ड नियुक्ति में पारदर्शिता का अभाव
पानी, सुरक्षा, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी
विस्तृत जांच के निर्देश
इन सभी शिकायतों और मीडिया रिपोर्टों को गंभीरता से लेते हुए अपर आवास आयुक्त/अपर निबंधक ने निर्देश दिए हैं कि पूरे मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच की जाए। सहकारी अधिकारी (आवास), गाजियाबाद को यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि:
सभी तथ्यों की साक्ष्यों सहित जांच की जाए
समिति के कार्य-व्यवसाय का परीक्षण किया जाए
एक पक्ष के भीतर स्पष्ट संस्तुति सहित रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए
साथ ही समिति प्रबंधन को निर्देशित किया गया है कि वे जांच अधिकारी को पूरा सहयोग प्रदान करें, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
आगे क्या हो सकता है
यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित अधिकारियों, पूर्व प्रबंध समिति के सदस्यों और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, आर्थिक दंड, पद से हटाना और मुकदमा दर्ज होने की संभावना भी बनी हुई है।
वहीं आम समिति सदस्यों को अब प्रशासन से उम्मीद है कि वर्षों से चले आ रहे इस विवाद का निष्पक्ष समाधान होगा और उन्हें उनकी जमीन व अधिकार वापस मिलेंगे।