मुख्य बिंदु
• टोंगा के नेयाफू के पास 7.6 तीव्रता का भूकंप
• 235 किमी से अधिक गहराई के कारण नुकसान नहीं
• सुनामी की कोई चेतावनी जारी नहीं

PKN live l ओशनिया महाद्वीप के टोंगा क्षेत्र में मंगलवार 24 मार्च को आए शक्तिशाली भूकंप ने इलाके में दहशत फैला दी. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.6 मापी गई, जो किसी भी क्षेत्र के लिए बेहद गंभीर मानी जाती है. भूकंप के तेज झटकों के कारण लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए. हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक किसी बड़े नुकसान या हताहत होने की कोई सूचना सामने नहीं आई है.
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार यह भूकंप टोंगा के नेयाफू क्षेत्र के पास आया. भूकंप का केंद्र नेयाफू से लगभग 153 किलोमीटर पश्चिम दिशा में स्थित था. सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि यह भूकंप धरती की सतह से लगभग 235 किलोमीटर से अधिक की गहराई में आया था.
विशेषज्ञों के अनुसार, भूकंप की गहराई जितनी अधिक होती है, उसका सतह पर प्रभाव उतना कम महसूस होता है. यही कारण है कि इतनी अधिक तीव्रता के बावजूद इस भूकंप से व्यापक नुकसान की खबरें सामने नहीं आईं.
भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 9 बजकर 37 मिनट पर दर्ज किया गया. झटके इतने तेज थे कि आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग तुरंत घरों से बाहर निकल आए और खुले स्थानों की ओर भागे. हालांकि कुछ ही देर में स्थिति सामान्य हो गई.
प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने भी इस भूकंप को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी. केंद्र के अनुसार, चूंकि यह भूकंप समुद्र के भीतर बहुत अधिक गहराई पर आया था, इसलिए सुनामी का खतरा नहीं बना. इसी वजह से किसी प्रकार की सुनामी चेतावनी जारी नहीं की गई.
टोंगा एक द्वीपीय देश है, जो दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित है. इसमें लगभग 171 द्वीप शामिल हैं, जिनमें से कई छोटे और कम आबादी वाले हैं. इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति इसे भूकंपीय गतिविधियों के लिए संवेदनशील बनाती है.
दरअसल, टोंगा प्रशांत महासागर के उस हिस्से में स्थित है जिसे “रिंग ऑफ फायर” कहा जाता है. यह क्षेत्र दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंप और ज्वालामुखी क्षेत्रों में से एक माना जाता है. यहां टेक्टोनिक प्लेट्स लगातार सक्रिय रहती हैं, जिसके कारण समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं.
भूकंप के बाद स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है. शुरुआती रिपोर्ट्स में किसी बड़े नुकसान की जानकारी नहीं मिली है, लेकिन दूरदराज के द्वीपों से पूरी जानकारी आने में समय लग सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के गहरे भूकंप आमतौर पर सतह पर कम विनाशकारी होते हैं, लेकिन उनकी तीव्रता अधिक होने के कारण उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. ऐसे भूकंप भविष्य में आने वाली गतिविधियों का संकेत भी हो सकते हैं.
भूकंप के तुरंत बाद स्थानीय लोगों में डर का माहौल जरूर देखा गया, लेकिन प्रशासन की तत्परता और समय पर मिली जानकारी के कारण स्थिति नियंत्रण में रही.
यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं किसी भी समय आ सकती हैं. खासकर उन क्षेत्रों में जो भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील हैं, वहां सतर्कता और तैयारी बेहद जरूरी है.
कुल मिलाकर, टोंगा में आया यह 7.6 तीव्रता का भूकंप एक बड़ा झटका जरूर था, लेकिन इसकी अधिक गहराई ने संभावित बड़े नुकसान को टाल दिया. फिलहाल स्थिति सामान्य है और किसी प्रकार की सुनामी या बड़े खतरे की आशंका नहीं है.